अमेठी: सरकारी धन गबन मामले में सीबीआई की बड़ी कार्रवाई, यूपी के 5 जिलों में छापेमारी

नई दिल्ली, 17 जून । केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले में लगभग 4 करोड़ रुपए के सरकारी धन के कथित गबन से जुड़े मामले में बुधवार को बड़ी कार्रवाई की। एजेंसी ने पांच जिलों में 14 स्थानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई लखनऊ, अयोध्या, कुशीनगर, प्रतापगढ़ और अमेठी में की गई, जहां से जांच से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और अन्य आपत्तिजनक सामग्री बरामद की गई है।

सीबीआई ने यह मामला 8 जून को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ के 25 मई 2026 के आदेश के अनुपालन में दर्ज किया था। यह मामला श्रवण कुमार द्विवेदी बनाम उत्तर प्रदेश सरकार एवं अन्य शीर्षक वाली याचिका से जुड़ा है। इससे पहले, यह मामला 21 मार्च 2025 को अमेठी जिले के गौरीगंज थाने में दर्ज किया गया था। शिकायत बेसिक शिक्षा विभाग, गौरीगंज के वित्त एवं लेखा अधिकारी द्वारा दर्ज कराई गई थी, जिसमें सरकारी धन के दुरुपयोग और गबन के गंभीर आरोप लगाए गए थे।

सीबीआई की ओर से दर्ज मामले में पांच लोगों को आरोपी बनाया गया है। इनमें बेसिक शिक्षा विभाग, गौरीगंज का तत्कालीन जूनियर अकाउंट्स क्लर्क, एक ब्लॉक क्वालिटी कोऑर्डिनेटर, एक ब्लॉक एमआईएस कोऑर्डिनेटर, जगदीशपुर स्थित प्राथमिक विद्यालय बेचूगढ़ के प्रधानाध्यापक तथा गौरीगंज क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय पूरे शिवदास गुदुर के एक सहायक शिक्षक शामिल हैं।

जांच एजेंसी के अनुसार, आरोप है कि मुख्य आरोपी ने अपने सहयोगियों और अन्य अज्ञात व्यक्तियों के साथ मिलकर आपराधिक साजिश रची और सरकारी खजाने से धनराशि को अवैध रूप से विभिन्न बैंक खातों में स्थानांतरित कर करीब 4 करोड़ रुपए का गबन किया। प्राथमिक जांच में यह सामने आया है कि सरकारी योजनाओं और विभागीय मदों के लिए आवंटित धन को नियमों के विपरीत विभिन्न बैंक खातों में भेजा गया। आरोप है कि यह पूरी प्रक्रिया सुनियोजित तरीके से की गई, जिससे सरकारी धन का दुरुपयोग कर निजी लाभ प्राप्त किया जा सके।

सीबीआई अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस कथित घोटाले में और कौन-कौन लोग शामिल थे तथा सरकारी धन को किन-किन माध्यमों से खर्च या निवेश किया गया। तलाशी के दौरान सीबीआई टीमों ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए हैं। एजेंसी के अनुसार, बरामद दस्तावेज कथित तौर पर गबन की गई राशि के निवेश और उपयोग से जुड़े हैं।

इसके अलावा, जांच अधिकारियों ने कई डिजिटल उपकरण, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और अन्य आपत्तिजनक सामग्री भी अपने कब्जे में ली है, जिनकी फोरेंसिक जांच कराई जाएगी। माना जा रहा है कि इन डिजिटल साक्ष्यों से धन के लेन-देन, बैंक खातों और संभावित लाभार्थियों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है।

Source: IANS

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