कोलकाता सिंडिकेट केस: ईडी ने कारोबारी जॉय कामदार को पकड़ा, पुलिस अधिकारी के घर भी रेड

कोलकाता, 19 अप्रैल । प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने रविवार को कोलकाता के कारोबारी जॉय कामदार और कोलकाता पुलिस के डिप्टी कमिश्नर शांतनु सिन्हा बिस्वास के ठिकानों पर छापेमारी की और फिर कामदार को गिरफ्तार कर लिया।

यह कार्रवाई एक कथित आपराधिक सिंडिकेट से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के तहत की गई है।

ईडी अधिकारी ने बताया कि 'सन एंटरप्राइज' के मैनेजिंग डायरेक्टर कामदार को चार घंटे की पूछताछ के बाद हिरासत में ले लिया गया।

उन्हें रविवार को छापेमारी के दौरान दक्षिण कोलकाता के बेहाला इलाके में स्थित उनके घर से हिरासत में लिया गया और सॉल्ट लेक स्थित सीजीओ कॉम्प्लेक्स में ईडी दफ्तर लाया गया। पूछताछ के बाद उन्हें 'मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम' (पीएमएलए) के प्रावधानों के तहत गिरफ्तार कर लिया गया। अधिकारियों ने बताया कि उन्हें अदालत में पेश किया जाएगा, जहां एजेंसी उनसे विस्तृत पूछताछ के लिए उनकी हिरासत की मांग करेगी।

हालांकि, मेडिकल जांच के लिए अस्पताल ले जाते समय कारोबारी की तबीयत बिगड़ गई। इसके बाद उन्हें आगे की जांच के लिए आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल ले जाया गया।

इससे पहले दिन में ईडी अधिकारियों ने बेहाला स्थित उनके घर पर छापेमारी की थी। इसी अभियान के तहत ईडी ने दक्षिण कोलकाता के बालीगंज इलाके में कोलकाता पुलिस के डिप्टी कमिश्नर शांतनु सिन्हा बिस्वास के दो ठिकानों पर भी छापेमारी की।

ईडी द्वारा दिन में जारी एक बयान में कहा गया, "ईडी ने कोलकाता पुलिस के डिप्टी कमिश्नर शांतनु सिन्हा बिस्वास के बालीगंज स्थित घर और 'सन एंटरप्राइज' के मैनेजिंग डायरेक्टर जॉय कामदार के बेहाला स्थित घर पर छापेमारी की। अब तक, 'मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम' (पीएमएलए), 2002 के तहत दर्ज एक मामले में सोना पप्पू और जॉय कामदार से जुड़े होने के आरोप में शांतनु सिन्हा बिस्वास के दो ठिकानों और जॉय कामदार के एक ठिकाने पर छापेमारी की गई है।"

स्थानीय लोगों का दावा है कि कामदार मुख्य रूप से रियल एस्टेट डेवलपमेंट (प्रमोशन) और निर्माण के कारोबार से जुड़े हैं। उनके घर पर पहले भी तलाशी ली जा चुकी है। इस महीने की शुरुआत में सोना पप्पू के घर की तलाशी के दौरान कामदार का नाम सामने आया था। केंद्रीय जांच एजेंसी ने बेहाला स्थित उनके घर से नकदी भी बरामद की थी। ईडी ने कारोबारी को पूछताछ के लिए दो बार समन भी भेजा था, लेकिन वह दोनों ही बार पेश नहीं हुए। इसके बाद, ईडी के अधिकारी रविवार को फिर से उसके घर गए।

ईडी के एक अधिकारी ने बताया कि यह छापा सोना पप्पू के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले की जांच के लिए मारा गया था। सोना पप्पू पर हत्या की कोशिश और रंगदारी मांगने के कई मामले दर्ज हैं।

आरोप है कि सोना पप्पू दक्षिण कोलकाता के कस्बा और बालीगंज इलाकों में सिंडिकेट चलाता है, और उस पर अलग-अलग आरोपों में कई एफआईआर दर्ज हैं। फरवरी में हुए गोलपार्क झड़पों का भी वह मुख्य आरोपी है। वह फिलहाल फरार है और समय-समय पर सोशल मीडिया पर लाइव आकर केंद्रीय जांच एजेंसी पर उसके परिवार वालों को परेशान करने का आरोप लगाता रहता है।

अधिकारियों का आरोप है कि पप्पू कंस्ट्रक्शन कंपनियों से करोड़ों रुपए की रंगदारी वसूलता था, जिसे बाद में प्रभावशाली लोगों तक पहुंचा दिया जाता था। ईडी ने इस मामले में तलाशी का पहला दौर 1 अप्रैल को चलाया था।

उस समय ईडी ने तलाशी के दौरान कुछ जगहों से 1.47 करोड़ रुपए नकद, 67.64 लाख रुपए के सोने-चांदी के गहने और एक देसी पिस्तौल जब्त की थी।

यह जांच कोलकाता पुलिस द्वारा पप्पू के खिलाफ दर्ज एक एफआईआर से शुरू हुई थी, जिसमें उस पर दंगा भड़काने, हत्या की कोशिश, आपराधिक साजिश रचने और हथियार कानून का उल्लंघन करने का आरोप था।

ईडी ने 9 अप्रैल को एक बयान में कहा था कि पप्पू समेत अन्य आरोपी पश्चिम बंगाल में संगठित आपराधिक सिंडिकेट की गतिविधियों में शामिल थे और सिंडिकेट के जरिए अवैध रूप से पैसा कमाते थे। ईडी ने पप्पू को समन भी भेजा था, लेकिन वह अब तक अधिकारियों के सामने पेश नहीं हुआ है।

Source: IANS

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