असामाजिक तत्व शांतिपूर्ण आंदोलनों में हिंसा भड़काने की साजिश रच रहे हैं: सोनम वांगचुक
सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक के अनशन का गुरुवार को 26वां दिन रहा। इस बीच वांगचुक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में असामाजिक तत्वों के खिलाफ नाराजगी जाहिर की।

नई दिल्ली, 23 जुलाई । सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक के अनशन का गुरुवार को 26वां दिन रहा। इस बीच वांगचुक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में असामाजिक तत्वों के खिलाफ नाराजगी जाहिर की।
उन्होंने अपनी पोस्ट में कहा कि शांति और सिर्फ शांति ही मेरा रास्ता है...जंतर-मंतर पर तो विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से चल रहे हैं, लेकिन मुझे यह जानकर दुख हुआ कि दूसरी जगहों पर कुछ असामाजिक तत्व इन शांतिपूर्ण प्रदर्शनों का फायदा उठाकर हिंसा भड़काने की कोशिश कर रहे हैं। सामने वाला पक्ष चाहे कुछ भी करे, हमारा जवाब सिर्फ फूलों जैसा ही होना चाहिए। कृपया हर हाल में इस परंपरा को बनाए रखें।
इससे पहले बुधवार को सोनम वांगचुक ने अपना अनशन खत्म करने के लिए सरकार के सामने कुछ शर्तें रखी। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह को लिखे एक पत्र में वांगचुक ने मेदांता अस्पताल में उनसे मिलने और अनशन खत्म करने की अपील करने के लिए उनका धन्यवाद किया।
वांगचुक ने पत्र में कहा कि हमारी बातचीत के दौरान, आपने मुझे भरोसा दिलाया कि सरकार परीक्षा का पेपर लीक होने के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को उचित मुआवजा देने पर सकारात्मक रूप से विचार करेगी। साथ ही, जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए संसद में सार्थक चर्चा शुरू करेगी, जिसमें शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर विचार करना भी शामिल है।
20 जुलाई को हुए 'चलो संसद' मार्च का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि पुलिस द्वारा किए गए 'अत्याचार और बल के अत्यधिक प्रयोग' के बावजूद यह मार्च शांतिपूर्ण रहा।
उन्होंने कहा कि पूरे देश और दुनिया ने लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करने के उनके धैर्य और संकल्प को देखा। मुझे पूरी उम्मीद है कि लोकतांत्रिक संस्थाओं में इस भरोसे को किसी भी कानूनी मामले, उत्पीड़न या इसमें शामिल लोगों के खिलाफ बदले की भावना से की गई कार्रवाई से और कमजोर नहीं किया जाएगा।
वांगचुक ने कहा कि मंत्रियों के दौरे के बाद, अलग-अलग राजनीतिक दलों के लगभग 65 सांसदों ने उनसे संपर्क किया और उनसे अपना अनशन खत्म करने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि उन्होंने मुझे याद दिलाया कि देश की सेवा में मुझे अभी बहुत काम करना है। मैं उनसे सहमत हूं। मैं जीना चाहता हूं। मैं अपने छात्रों, शिक्षा और उस काम में लौटना चाहता हूं जिसने मेरी जिंदगी को एक पहचान दी है। लेकिन मैं उन युवाओं की कीमत पर ऐसा नहीं कर सकता, जिनके लिए यह आंदोलन शुरू हुआ था।
Source: IANS

