दिल्ली पुलिस के सूत्रों का दावा- पुलिसकर्मियों पर किए गए जानलेवा हमले, कुछ लोगों ने उकसाए थे प्रदर्शनकारी

नई दिल्ली, 25 जुलाई । दिल्ली पुलिस ने 20 जुलाई की झड़पों के मामले में दर्ज एफआईआर में हत्या के प्रयास समेत कई गंभीर धाराएं जोड़ी हैं। पुलिस सूत्रों ने दावा किया कि कुछ लोगों ने भीड़ को बैरिकेड तोड़कर संसद की ओर बढ़ने के लिए उकसाया था। इसी विरोध प्रदर्शन में भीड़ ने पुलिसकर्मियों की हत्या की नीयत से हमला किया, जिससे कई जवान घायल हुए।

दिल्ली पुलिस से जुड़े सूत्रों ने जानकारी दी कि रेल भवन और संसद के बेहद नजदीक हुई झड़पों के मामले में कर्तव्य पथ थाने में दर्ज एक एफआईआर में हत्या के प्रयास समेत गंभीर धाराएं लगाई गई हैं। यह एफआईआर कर्तव्य पथ थाने में तैनात एक इंस्पेक्टर की शिकायत पर दर्ज हुई थी।

शिकायत के अनुसार, इंस्पेक्टर की ड्यूटी सुबह 5 बजे से जोन-11 (पिंक बूथ) पर थी। वायरलेस पर मिली सूचना के बाद पुलिस टीम रेल भवन राउंडअबाउट के बैरिकेड्स पर पहुंची। यहां पहले से ही हजारों प्रदर्शनकारी मौजूद थे। एफआईआर में दावा किया गया है कि प्रदर्शनकारियों को क्षेत्र में बीएनएस की धारा 163 के लागू होने और प्रदर्शन की अनुमति नहीं होने की सूचना दी गई थी। बार-बार चेतावनी के बावजूद प्रदर्शनकारी पीछे नहीं हटे और नारेबाजी करते रहे।

एफआईआर में कहा गया है, "कुछ लोगों ने भीड़ को बैरिकेड तोड़कर संसद की ओर बढ़ने के लिए उकसाया था। इसी दौरान, प्रदर्शनकारियों ने पुलिसकर्मियों को घेरा, मारपीट की और चप्पल व पत्थर फेंके। वहीं, भीड़ ने पुलिसकर्मियों की हत्या की नीयत से हमला किया, जिससे कई जवान घायल हुए। संसद और अन्य महत्वपूर्ण संस्थानों की सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस ने हल्का लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले छोड़े।"

बता दें कि 20 जुलाई की झड़पों में 129 पुलिसकर्मी और 60 से अधिक प्रदर्शनकारी घायल हुए। इस विवाद के बाद पुलिस ने अब तक तकरीबन 15 एफआईआर दर्ज की हैं।

उधर, जंतर मंतर पर हो रहे प्रदर्शन से जुड़ी गलत जानकारियों पर स्पष्टीकरण देने के मामले में दिल्ली पुलिस शनिवार को प्रेस कांफ्रेंस करेगी। सोशल मीडिया पर फैल रही तमाम तरह की गलत जानकारियों को लेकर डीसीपी सेंट्रल रोहित राजबीर पुलिस का पक्ष रखेंगे।

Source: IANS

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