कौन हैं नंदन नीलेकणि, जिन पर कांग्रेस के बाद पीएम मोदी ने भी जताया भरोसा, परीक्षा सुधार का सौंपा जिम्मा

नई दिल्ली, 26 जुलाई । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार शाम एक वीडियो संदेश जारी कर कहा कि छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए सरकार कड़े कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि कठोर कानून बनाने के लिए सोमवार को संसद में चर्चा की जाएगी। इसके साथ ही परीक्षा प्रणाली में टेक्नोलॉजी के अधिक से अधिक इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने नंदन नीलेकणि के नेतृत्व में हाई पावर टास्क फोर्स बनाने की घोषणा की है।

नंदन नीलेकणि देश के जाने-माने टेक्नोलॉजी उद्यमी, समाजसेवी और नीति विशेषज्ञ हैं। वह भारत की प्रमुख आईटी कंपनी इंफोसिस के सह-संस्थापक हैं और देश के डिजिटल बदलाव में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। नीलेकणि पहले भी ऐसे प्रोजेक्ट्स पर काम कर चुके हैं, जिससे 'डिजिटल इंडिया' को मजबूती मिली है।

नंदन नीलेकणि का जन्म 2 जून 1955 को बेंगलुरु में हुआ था। उन्होंने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) बॉम्बे से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। तकनीकी क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने के बाद वह भारत के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण से भी जुड़े।

नंदन नीलेकणि ने साल 1981 में एनआर नारायण मूर्ति और अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर इंफोसिस की स्थापना की। उन्होंने कंपनी के विकास में अहम भूमिका निभाई। वह 2002 से 2007 तक इंफोसिस के सीईओ रहे और इसके बाद 2007 से 2009 तक कंपनी के चेयरमैन पद पर रहे।

साल 2009 में नंदन नीलेकणि को भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। इस दौरान उन्होंने भारत की डिजिटल पहचान प्रणाली आधार के निर्माण और विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इतना ही नहीं, नंदन नीलेकणि की यूपीआई, फास्ट टैग, जीएसटी जैसी टेक्नोलॉजी की बुनियाद रखने में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

नंदन नीलेकणि ने साल 2014 में राजनीति में भी कदम रखा। उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर बेंगलुरु दक्षिण लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा था, हालांकि उन्हें हार का सामना करना पड़ा। नंदन नीलेकणि को भाजपा उम्मीदवार अनंत कुमार से हार का सामना करना पड़ा था।

नंदन नीलेकणि शिक्षा, सामाजिक विकास और तकनीकी परियोजनाओं से जुड़े कार्यों में भी योगदान देते रहे हैं। उन्होंने 'इमेजनिंग इंडिया: आइडियाज फॉर द न्यू सेंचुरी' नाम की किताब भी लिखी है, जिसमें भारत के विकास, चुनौतियों और संभावनाओं पर चर्चा की गई है।

टेक्नोलॉजी और डिजिटल बदलाव के क्षेत्र में नंदन नीलेकणि को भारत के प्रमुख चेहरों में गिना जाता है। अब परीक्षा प्रणाली में सुधार और टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल को बढ़ाने के लिए सरकार ने उन्हें एक नई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है।

Source: IANS

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