'मैं एसी रूम में बैठने वाला एक्टिविस्ट नहीं', जयराम रमेश को 'स्ट्रीट फाइटर' धर्मेंद्र प्रधान की खरी-खरी

नई दिल्ली, 27 जुलाई । केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा देने के बाद धर्मेंद्र प्रधान सोमवार को पहली बार संसद पहुंचे। इस दौरान भाजपा और एनडीए के सांसदों ने उनका जोरदार स्वागत किया। यह ओडिशा के इस नेता के लिए एनडीए के लगातार और अटूट समर्थन को दिखाता है।

इस दौरान कांग्रेस सांसद जयराम रमेश पूर्व केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के पास गए और उनके इस्तीफे पर सहानुभूति जताते हुए कहा, "ऐसा होता रहता है।"

इस पर धर्मेंद्र प्रधान ने कड़े लहजे में जवाब दिया, "कुछ नहीं हुआ है। मैं जमीनी संघर्ष करने वाला नेता हूं। एसी रूम में बैठकर काम करने वाला एक्टिविस्ट नहीं।"

जानकारों का मानना ​​है कि इस छोटी सी बातचीत से यह संदेश गया कि कैबिनेट से हटने के बावजूद धर्मेंद्र प्रधान राजनीतिक रूप से आत्मविश्वास से भरे हुए हैं।

भाजपा के एक सांसद ने कहा कि शायद यह पहली बार है कि जब किसी केंद्रीय मंत्री ने बिना किसी व्यक्तिगत आरोप का सामना किए इस्तीफा दिया है। देश की परीक्षा प्रणाली में कथित नीट 2026 पेपर लीक और अन्य गड़बड़ियों को लेकर 'कॉकरोच जनता पार्टी' के नेतृत्व में हफ्तों तक चले देशव्यापी विरोध-प्रदर्शनों के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को इस्तीफा दे दिया था।

उनके इस्तीफे के बाद यह अटकलें लगाई जा रही हैं कि भाजपा उन्हें संगठन की कोई अहम जिम्मेदारी सौंप सकती है या विधानसभा चुनाव वाले पांच राज्यों में से किसी एक में पार्टी के अभियान का नेतृत्व करने की जिम्मेदारी दे सकती है।

ओडिशा में भाजपा के सबसे बड़े नेताओं में से एक होने के अलावा, धर्मेंद्र प्रधान ने देशभर में चुनाव से जुड़ी अहम जिम्मेदारियां संभाली हैं, जिनमें बिहार, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड और कर्नाटक शामिल हैं। उन्होंने भाजपा के पश्चिम बंगाल कैंपेन में भी अहम भूमिका निभाई, जहां पार्टी ने मई में राज्य में अपनी पहली सरकार बनाई।

इस्तीफे के बाद से भाजपा के वरिष्ठ नेता धर्मेंद्र प्रधान के समर्थन में खड़े हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उनके घर जाकर मुलाकात की, जबकि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान की तारीफ की।

पार्टी नेताओं का कहना है कि उनका इस्तीफा राजनीतिक जवाबदेही, त्याग और राष्ट्रीय हित में उठाए गए कदम को दिखाता है, न कि उनके राजनीतिक कद में किसी गिरावट को। अपने इस्तीफे के बयान में प्रधान ने कहा कि उन्हें हाल की घटनाओं से दुख हुआ है और उन्होंने भारत के युवाओं के हितों की रक्षा करने के अपने संकल्प को दोहराया।

Source: IANS

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