सुदर्शन पटनायक ने स्नान पूर्णिमा और महाप्रभु जगन्नाथ के दिव्य प्राकट्य दिवस पर बनाई रेत की कलाकृति

पुरी, 29 जून । स्नान पूर्णिमा के शुभ अवसर पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मशहूर सैंड आर्टिस्ट और पद्मश्री पुरस्कार विजेता सुदर्शन पटनायक ने रविवार को ओडिशा के पुरी बीच पर रेत की एक शानदार कलाकृति बनाई। इस कलाकृति में 'जय जगन्नाथ' और 'स्नान पूर्णिमा' के संदेश दिए गए हैं, जो महाप्रभु जगन्नाथ के दिव्य प्राकट्य दिवस और पवित्र स्नान उत्सव का जश्न मनाते हैं।

स्नान पूर्णिमा जगन्नाथ परंपरा के सबसे पवित्र त्योहारों में से एक है, जिसे ज्येष्ठ की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। इसे महाप्रभु जगन्नाथ के दिव्य प्राकट्य दिवस (जन्मदिन) के रूप में भी मनाया जाता है। इस शुभ अवसर पर महाप्रभु जगन्नाथ, महाप्रभु बलभद्र, देवी सुभद्रा और श्री सुदर्शन को पवित्र स्नान मंडप में 108 घड़े पवित्र जल से विधिवत स्नान कराया जाता है।

सुदर्शन पटनायक द्वारा बनाई गई 8 फुट ऊंची और 18 फुट चौड़ी रेत की कलाकृति पवित्र स्नान पूर्णिमा की रस्म को खूबसूरती से दिखाती है, जिसके दौरान भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र, देवी सुभद्रा और सुदर्शन चक्र को 108 घड़े पवित्र जल से स्नान कराया जाता है, जो वार्षिक रथ यात्रा उत्सव की शुरुआत का प्रतीक है। इस कलात्मक श्रद्धांजलि के माध्यम से सुदर्शन पटनायक ने शांति, भक्ति और ओडिशा की समृद्ध सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत के प्रति सम्मान का संदेश दिया। यह कलाकृति सुदर्शन सैंड आर्ट इंस्टीट्यूट के छात्रों के सहयोग से बनाई गई थी।

इस मौके पर सुदर्शन पटनायक ने कहा, "स्नान पूर्णिमा का बहुत बड़ा आध्यात्मिक महत्व है। इस रेत की कलाकृति के जरिए, मैं महाप्रभु जगन्नाथ से प्रार्थना करता हूं और सभी की शांति, समृद्धि और भलाई के लिए आशीर्वाद मांगता हूं।"

मुंबई से आए पर्यटक प्रीतम पटनायक ने कहा, "मैं स्नान पूर्णिमा देखने पुरी आया हूं। आज हम समुद्र तट पर टहलने गए थे, तभी अचानक हमने सुदर्शन पटनायक की बनाई रेत की कलाकृति देखी। यह सचमुच बहुत सुंदर और प्रभावशाली थी। हम खुद को खुशकिस्मत मानते हैं कि हमें आज उनकी अद्भुत रेत की कलाकृति देखने का मौका मिला। ऐसा अनुभव किस्मत वालों को ही मिलता है। स्नान पूर्णिमा देखने के लिए पुरी की यह मेरी पहली यात्रा है। मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं एक दिन यहां आऊंगा और इतने शानदार दर्शन करूंगा। मुझे उम्मीद है कि कल के दर्शन भी बहुत सुखद होंगे। मैं सभी से गुज़ारिश करूंगा कि वे अपनी जिंदगी में कम से कम एक बार पुरी जरूर आएं और महाप्रभु भगवान जगन्नाथ का आशीर्वाद लें।"

Source: IANS

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