दिल्ली को 'क्रिएटिव दिल्ली' के रूप में स्थापित करने की तरफ पहला कदम: सीएम रेखा गुप्ता

नई दिल्ली, 30 मार्च। दिल्ली में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव का समापन पुरस्कार वितरण समारोह हुआ, जहां सीएम रेखा गुप्ता, उपराज्यपाल तरनजीत संधू और संस्कृति मंत्री कपिल मिश्रा पहुंचे। समारोह में मंच पर फिल्म निर्देशक ओम प्रकाश मेहरा को अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।

अपनी स्पीच में दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता ने कहा, "हमेशा से कहा जाता है, चलो दिल्ली, यानी दिल्ली शक्ति का रूप है, यहां पावर है, लेकिन दिल्ली को क्रिएटिव दिल्ली के रूप में स्थापित करने के लिए जो पहला कदम उठाया गया, वो कपिल मिश्रा और पर्यटन विभाग की पूरी टीम ने किया।"

फिल्म 'क्रांति' का जिक्र करते हुए सीएम रेखा गुप्ता ने कहा, "क्रांति ऐसी फिल्म थी, जिसे हमने बहुत बार देखा और जितनी बार देखा, तो लगा काश हम भी देश के लिए कुछ कर पाते। क्रांति को देखने के बाद खून में देशभक्ति दौड़ने लगती है।" सीएम रेखा गुप्ता ने आमिर खान की फिल्म 'थ्री इडियट्स' और विक्की कौशल की 'छांवा' का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, "इन शानदार फिल्मों ने हमारे अंदर अलग-अलग भाव भरे। किसी ने हंसाया तो किसी ने रुलाया। इन फिल्मों ने हमारे सामने उन कहानियों को प्रस्तुत किया, जिनके बारे में हमने सुना था। इसलिए कहा जाता है कि फिल्में समाज का आईना होती हैं।"

वहीं अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव दिल्ली (आईएफएफडी) में एलजी तरनजीत सिंह संधू ने कहा, "भारत में कहीं एक छोटे से कमरे में बैठा एक युवा फिल्म निर्माता, कोई भव्य स्टूडियो नहीं, कोई बड़ा बजट नहीं, बस एक कहानी, शायद किसी दादी की याद, शहर की अराजकता, एक शांत प्रेम या एक मौन संघर्ष। वह कहानी एक नोटबुक से कैमरे तक, फिर स्क्रीन तक पहुंचती है और एक दिन उसे इस तरह के महोत्सव में जगह मिल जाती है और जो अचानक उनके लिए निजी था, वह दुनिया के लिए कहानी बन जाता है।"

एलजी तरनजीत सिंह ने आगे कहा, "यही सिनेमा की खूबसूरती है, और हमने इस मंच पर बीते दिनों में यही देखा। कहानी भाषा, कल्चर और सीमा से परे होती है। फिल्मों के जरिए सिर्फ कहानी ही नहीं बताई जाती; इसके साथ मानवता का भी प्रसार होता है। कुछ कहानियां हमारी भाषा की नहीं होतीं, लेकिन दूसरी भाषा की होने के बाद भी हम उनसे कनेक्टिव महसूस कर पाते हैं।"

उन्होंने आगे कहा, अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव दिल्ली निर्माता और कलाकारों के लिए सिर्फ मंच नहीं है, बल्कि वो खिड़की है, जिससे पूरा विश्व हमें देख रहा है और हम पूरे विश्व के सामने खुद को रख पा रहे हैं।

Source: IANS

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