अयोध्या के संत बोले- 'रामलला के दर्शन में कमी नहीं', चढ़ावा मामले में सुनवाई पर कहा, 'हित में होगा कोर्ट का फैसला'

अयोध्या, 27 जुलाई । राम मंदिर के चढ़ावे में कथित तौर पर गबन से जुड़े आरोपों के बावजूद रामलला के दर्शन के लिए जबरदस्त भीड़ उमड़ रही है। अयोध्या के संतों ने कहा कि भक्त आसानी से दर्शन कर रहे हैं और सही से पूजा-पाठ हो रहा है। इसके साथ ही, मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई पर भी संतों ने प्रतिक्रिया दी है।

राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्य दिनेंद्र दास ने आईएएनएस से बातचीत करते हुए कहा कि भक्तों को आसानी से दर्शन हो रहे हैं। सही से पूजा-पाठ होता है और दर्शन करने वालों की कमी नहीं है। उन्होंने बताया कि अयोध्या में भक्तों की भीड़ बढ़ रही है।

इसके साथ ही, दिनेंद्र दास ने दान प्रकरण मामले में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई का स्वागत किया। साथ ही पूरी जांच के लिए नई एसआईटी के गठन का समर्थन किया। उन्होंने कहा, "राम मंदिर का लगभग 99 प्रतिशत कार्य संपन्न हो चुका है। अब सुधार भी होगा। सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद अच्छा सुधार देखने को मिलेगा।"

मंदिर ट्रस्ट के सदस्य दिनेंद्र दास ने कहा कि अयोध्या के लोगों को पूरी जानकारी है कि मामले में क्या हो रहा है और क्या नहीं हो रहा है। उन्होंने आगे कहा, "व्यवस्थाओं में सुधार हो रहा है। कुछ कुछ शंकाएं हैं तो एसआईटी जांच करेगी।"

उन्होंने एसआईटी की जांच में सहयोग करने की भी बात कही। दिनेंद्र दास ने कहा कि हम लोग जांच में भी सहयोग करेंगे, जिससे भविष्य में भी कोई दिक्कत नहीं होगी।

राम मंदिर के चढ़ावे में कथित तौर पर गबन से जुड़ी चार याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट सोमवार को सुनवाई करेगा। इस सुनवाई से पहले अयोध्या के साधु संतों ने प्रतिक्रिया दी है। संतों ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला देश हित में होगा।

वहीं, सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई पर जगतगुरु परमहंस आचार्य ने कहा, "सुप्रीम कोर्ट में आज की सुनवाई के दौरान जो कुछ होगा, वह देश और देश की संस्कृति के बेहतर रहेगा। न्याय का सबसे बड़ा मंदिर सुप्रीम कोर्ट ही है।

महामंडलेश्वर विष्णु दास ने कहा, "नई एसआईटी टीम के गठन का हम साधु-संत स्वागत करते हैं। मेरा मानना है कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला भी संतों के हित में ही होगा।" इस दौरान, उन्होंने आरोप लगाया कि राम मंदिर के दान प्रकरण पर विपक्ष गंदी राजनीति कर रहा है।

Source: IANS

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