ऊर्जा की कमी का सबसे ज्यादा असर ग्लोबल साउथ पर, नजरअंदाज करना ठीक नहीं : जयशंकर
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा है कि ऊर्जा आपूर्ति के प्रवाह का राजनीतिकरण 'बेहद नुकसानदेह' है और इसका 'सबसे ज्यादा खामियाजा' ग्लोबल साउथ के देशों को उठाना पड़ रहा है।
अटलांटा, 1 नवंबर । विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा है कि ऊर्जा आपूर्ति के प्रवाह का राजनीतिकरण 'बेहद नुकसानदेह' है और इसका 'सबसे ज्यादा खामियाजा' ग्लोबल साउथ के देशों को उठाना पड़ रहा है। उनके मुताबिक जी20 को इस समस्या को स्वीकार करना चाहिए और इसके समाधान के लिए प्रयास करने चाहिए।
अटलांटा में शनिवार को जी20 विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद भारतीय पत्रकारों से बातचीत में जयशंकर ने बैठक को "बेहद उपयोगी, खुला और जीवंत" बताया। उन्होंने कहा कि बैठक में भू-राजनीतिक परिस्थितियों, ऊर्जा एवं खाद्य सुरक्षा तथा आपूर्ति श्रृंखलाओं से जुड़े तीन प्रमुख विषयों पर चर्चा हुई।
ऊर्जा के मुद्दे पर भारत का पक्ष रखते हुए जयशंकर ने कहा, "ऊर्जा बाजार में विकृति और ऊर्जा आपूर्ति के प्रवाह का राजनीतिकरण ऐसी समस्याएं हैं, जिनका असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है। ऊर्जा की कमी का सबसे अधिक बोझ ग्लोबल साउथ के देश उठा रहे हैं। इसलिए इस चुनौती को केवल कुछ देशों की समस्या मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।"
उन्होंने कहा, "हमारा कहना था कि ऊर्जा बाजार में यह विकृति और ऊर्जा प्रवाह का राजनीतिकरण बेहद नुकसानदेह है। ऊर्जा की कमी का खामियाजा ग्लोबल साउथ भुगत रहा है। इस दिशा में कुछ किया जाना चाहिए और जी20 को इस मुद्दे को स्वीकार करना चाहिए।"
विदेश मंत्री ने खाद्य सुरक्षा को लेकर भी सदस्य देशों की चिंता का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि चर्चा केवल अनाज की आपूर्ति तक सीमित नहीं रही, बल्कि उर्वरकों की कमी से खाद्य उत्पादन और कृषि क्षेत्र पर पड़ने वाले प्रभावों पर भी विचार हुआ।
जयशंकर के मुताबिक, उर्वरकों की आपूर्ति से जुड़ी समस्या का एक हिस्सा काला सागर क्षेत्र से और दूसरा खाड़ी तथा लाल सागर क्षेत्र से संबंधित है। वहीं, अनाज की आवाजाही में बाधा का प्रमुख संबंध काला सागर से है। उन्होंने कहा कि जी20 के भीतर इन समस्याओं से निपटने के संभावित उपायों पर चर्चा हुई।
भू-राजनीतिक हालात पर चर्चा के दौरान भारत ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि बड़े अंतरराष्ट्रीय संघर्षों का समाधान सैन्य ताकत से नहीं निकाला जा सकता। जयशंकर ने कहा कि आज दुनिया दो ऐसे बड़े संघर्षों का सामना कर रही है, जिनका प्रभाव केवल संबंधित देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया पर पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि इन संघर्षों के समाधान के लिए कूटनीति का रास्ता तलाशना होगा। भारत का संदेश था कि बातचीत, शांति और संवाद के जरिए ही आगे बढ़ा जा सकता है।
जी20 की बैठक में आपूर्ति श्रृंखलाओं को अधिक विविध बनाने का मुद्दा भी भारत ने प्रमुखता से उठाया। जयशंकर ने कहा कि दुनिया को अब ऐसी आपूर्ति श्रृंखलाओं और विनिर्माण व्यवस्था की जरूरत है, जो किसी एक देश या भौगोलिक क्षेत्र पर अत्यधिक निर्भर न हो।
उन्होंने कहा कि महामारी, सैन्य संघर्ष और जलवायु संबंधी घटनाओं ने यह दिखाया है कि किसी एक क्षेत्र पर जरूरत से ज्यादा निर्भरता वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए जोखिम पैदा कर सकती है। ऐसे में उत्पादन के कई केंद्र विकसित करना और आपूर्ति के वैकल्पिक रास्ते तैयार करना जरूरी है।
जयशंकर ने कहा, "आज हमें अधिक विविध आपूर्ति श्रृंखलाओं की जरूरत है। विनिर्माण भी अलग-अलग स्थानों पर होना चाहिए, ताकि किसी एक भौगोलिक क्षेत्र में अत्यधिक उत्पादन केंद्रित न हो और पूरी दुनिया एक ही जगह पर निर्भर न रहे।"
उन्होंने आगाह किया कि वैश्विक आपूर्ति व्यवस्था को राजनीतिक या रणनीतिक हथियार बनाने की प्रवृत्ति से बचना चाहिए। उनके मुताबिक, इस खतरे से निपटने का सबसे प्रभावी तरीका उत्पादन और आपूर्ति के कई केंद्र विकसित करना है।
विदेश मंत्री ने कहा कि जी20 बैठक के दौरान भारत ने लगभग सभी देशों के साथ द्विपक्षीय बातचीत की। कुछ मुलाकातें अलग-अलग हुईं, जबकि कुछ प्रतिनिधियों के साथ समूह में चर्चा हुई।
उन्होंने कहा कि बैठक में भारत की उस भूमिका की सामान्य रूप से सराहना देखने को मिली, जिसके तहत वह मौजूदा ध्रुवीकृत वैश्विक माहौल में सभी पक्षों के साथ संवाद बनाए रखने में सक्षम है। भारत विभिन्न देशों के बीच संपर्क और संवाद का माध्यम बनने के साथ वैश्विक मुद्दों पर अपना योगदान दे रहा है।
जयशंकर ने बैठक को भारत के नजरिये से उपयोगी बताते हुए कहा कि भारत अपनी बात और दृष्टिकोण सदस्य देशों तक पहुंचाने में सफल रहा।
Source: IANS