अटलांटा में भारत के 'लौह पुरुष' को श्रद्धांजलि
अटलांटा में भारतीय वाणिज्य दूतावास (कॉन्सुलेट) परिसर में सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रतिमा पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।
अटलांटा, 1 नवंबर । अटलांटा में भारतीय वाणिज्य दूतावास (कॉन्सुलेट) परिसर में सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रतिमा पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इस दौरान भारतीय समुदाय के सदस्य भी मौजूद थे।
विदेश मंत्री जयशंकर ने 'राष्ट्रीय एकता दिवस' के अवसर पर इस प्रतिमा का अनावरण किया। अपनी इस यात्रा के दौरान उन्होंने महात्मा गांधी को भी पुष्पांजलि अर्पित की और वहां रहने वाले भारतीय समुदाय के लोगों से बातचीत की।
इस समारोह में अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा और अटलांटा में भारत के महावाणिज्य दूत (कॉन्सुल जनरल) डॉ. सुमित सेठ भी समुदाय के नेताओं के साथ शामिल हुए।
वाणिज्य दूतावास की पीली दीवारों और लाल फ्रेम वाली खिड़कियों के सामने, इस आयोजन ने राजनयिकों और भारतीय समुदाय के प्रतिनिधियों को भारत के स्वतंत्रता संग्राम की दो महान हस्तियों के इर्द-गिर्द एक साथ ला खड़ा किया। पूरा परिसर फूलों की मालाओं से सजा हुआ था। मेहमान लॉन में कतारबद्ध होकर खड़े हुए और उनके पीछे सरदार पटेल की प्रतिमा थी।
गांधी स्मारक पर, विदेश मंत्री जयशंकर ने फूलों से सजी प्रतिमा के सामने हाथ जोड़कर नमन किया। सरदार पटेल की प्रतिमा के पास, उन्होंने फूलों की पंखुड़ियां अर्पित कीं, जिससे प्रतिमा का गहरा आधार पीले, नारंगी और लाल रंगों से सज गया।
जिन समुदाय के सदस्यों ने इस प्रतिमा को अटलांटा लाने में मदद की, उनके लिए यह अनावरण एक लंबी और भागदौड़ भरी यात्रा का सुखद अंत था।
'फेडरेशन ऑफ गुजराती एसोसिएशन्स ऑफ यूएसए' के अध्यक्ष डॉ. वासुदेव पटेल ने आईएएनएस को बताया कि फेडरेशन की राष्ट्रीय टीम ने इस प्रतिमा को प्रायोजित (स्पॉन्सर) करने का निर्णय लिया था। उन्होंने बताया कि यह संगठन एक मुख्य संस्था है, जो अमेरिका में 110 से अधिक गुजराती संघों का प्रतिनिधित्व करती है।
उन्होंने बताया कि इस प्रतिमा का वजन 780 पाउंड है और इसे पीतल, तांबे तथा अन्य धातुओं से बनाया गया है। इसे भारत में तैयार किया गया था और 31 अक्टूबर के समारोह तथा विदेश मंत्री के कार्यक्रम के अनुसार समय पर पहुंचाने के लिए हवाई मार्ग (एयर फ्रेट) से भेजा गया था।
उन्होंने कहा, "यह हवाई मार्ग से आया और 24 घंटे के भीतर यहां पहुंच गया।"
इस औपचारिक अनावरण के पीछे समुदाय के आयोजकों की कड़ी मेहनत थी। प्रतिमा की व्यवस्था करने से लेकर, उसे भारत से लाने और विदेश मंत्री की यात्रा के लिए उसे पूरी तरह तैयार रखने में काफी परिश्रम किया गया। उन्होंने बताया कि आमंत्रित लोगों में फेडरेशन के दानदाता और समुदाय के अन्य नेता शामिल थे।
स्मृति पट्टिका में सरदार पटेल को "भारत का लौह पुरुष" (द आयरन मैन ऑफ इंडिया) बताया गया है और यह उनकी 151वीं जयंती के अवसर पर लगाई गई है। इस पर "एकता, शक्ति, कर्तव्य" शब्द लिखे हैं।
विदेश मंत्री जयशंकर ने भी सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए इस मौके का जिक्र किया और अनावरण को एक सम्मान बताया। उन्होंने कहा, "पटेल अपनी दूरदृष्टि, नेतृत्व और भारत की एकता व अखंडता में अपने योगदान के जरिए हमेशा प्रेरणा के स्रोत बने रहेंगे।"
समुदाय के लोगों के साथ अपनी बातचीत के बारे में एक अलग पोस्ट में उन्होंने लिखा: "भारतीय प्रवासियों के साथ बातचीत करना हमेशा सुखद होता है। उनकी उपलब्धियों और योगदान पर गर्व है।"
तस्वीरों में इस बातचीत के नजारे कैद हैं। लॉन में समुदाय के लोग विदेश मंत्री जयशंकर के चारों ओर जमा थे; कुछ लोग अपने फोन ऊपर उठाए हुए थे, जबकि कुछ अन्य उनके और स्मृति पट्टिका के बगल में खड़े होकर तस्वीरें खिंचवा रहे थे।
डॉ. पटेल के अनुसार, अटलांटा में की गई इस पहल के बाद ऐसी ही कोशिशें अन्य जगहों पर भी की जा सकती हैं। उन्होंने कहा कि जहां भी जगह उपलब्ध होगी, फेडरेशन वहां और मूर्तियां लगाने में मदद करने के लिए तैयार है, ताकि भारतीय मूल के लोग और अन्य समुदायों के लोग एक एकजुट भारत के निर्माण में सरदार पटेल के योगदान के बारे में जान सकें।
Source: IANS