आईएईए ने माना 'ईरान के नतांज परमाणु केंद्र को पहुंचा नुकसान'

नई दिल्ली, 3 मार्च। इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (आईएईए) ने पुष्टि की है कि ईरान के नतांज न्यूक्लियर फैसिलिटी में एंट्रेंस बिल्डिंग्स को थोड़ा नुकसान पहुंचा है। इजरायल की ओर से जारी सैटेलाइट तस्वीरों को लेकर उठ रहे सवालों के बीच यह बयान आया है।

पिछले दो दिनों की सैटेलाइट तस्वीरों में यूएस-इजरायली बमबारी अभियान के दौरान हुए नुकसान को साफ तौर पर दिखाया गया था। परमाणु कार्यक्रमों पर नजर रखने वाली अंतर्राष्ट्रीय एजेंसी ने ईरान के नतांज न्यूक्लियर फैसिलिटी कॉम्प्लेक्स को हुए नए नुकसान की पुष्टि की।

एजेंसी ने एक्स पर लिखा, "ताजा सैटेलाइट इमेजरी के आधार पर, आईएईए अब ईरान के अंडरग्राउंड नतांज फ्यूल एनरिचमेंट प्लांट (एफईपी) की एंट्रेंस बिल्डिंग्स (प्रवेश द्वार वाली इमारत) को हुए कुछ हालिया नुकसान की पुष्टि करती है," और आगे कहा, "कोई रेडियोलॉजिकल नतीजा होने की उम्मीद नहीं है और एफईपी पर कोई और असर नहीं देखा गया है, जिसे जून की लड़ाई में बहुत नुकसान हुआ था।"

नतांज फैसिलिटी जून में इजरायल और ईरान के बीच पिछले 12-दिन के युद्ध में मुख्य टारगेट में से एक थी, जिसमें यूएस भी आखिरकार शामिल हो गया था।

एजेंसी ने सोमवार को अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने दावा किया था कि यूएस-इजरायल के संयुक्त हमलों में ईरान के किसी परमाणु केंद्र को फिलहाल नुकसान पहुंचने के संकेत नहीं मिले हैं। इसके साथ ही उन्होंने दुनिया से अत्यधिक संयम बरतने की अपील भी की थी।

आईएईए प्रमुख ने स्पष्ट किया था कि बुशहर न्यूक्लियर पावर प्लांट, तेहरान रिसर्च रिएक्टर और अन्य ईंधन केंद्रों पर किसी हमले या क्षति की सूचना नहीं मिली थी।

ग्रॉसी ने कहा कि आईईसी लगातार ईरानी अधिकारियों से संपर्क की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन वहां से कोई जवाब नहीं मिल रहा है।

आईएईए के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के ईरान पर एक विशेष सत्र की शुरुआत करते हुए ग्रॉसी ने कहा, “ईरानी न्यूक्लियर रेगुलेटरी अथॉरिटीज से संपर्क करने की कोशिशें जारी हैं, लेकिन अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है। हमें उम्मीद है कि बातचीत का यह जरूरी चैनल जल्द से जल्द फिर से शुरू हो जाएगा।”

राफेल ग्रॉसी ने दुनिया को आगाह करते हुए 'अधिकतम संयम' बरतने की सिफारिश की। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर किसी परमाणु केंद्र पर हमला होता है, तो रेडियोएक्टिव रिसाव के कारण बड़े शहरों को खाली कराना पड़ेगा, जिससे गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है।

Source: IANS

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