तिब्बत में कथित अत्याचारों पर चीन की जांच के लिए अमेरिकी कांग्रेस में विधेयक पेश

वॉशिंगटन, 3 जून । अमेरिका के हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में दोनों पार्टियों के प्रतिनिधियों ने एक नया बिल पेश किया है। इस बिल के तहत अमेरिकी विदेश विभाग को यह तय करना होगा कि क्या चीन ने तिब्बत के लोगों के खिलाफ नरसंहार या मानवता के खिलाफ अपराध किए हैं।

यह बिल न्यू जर्सी के रिपब्लिकन प्रतिनिधि क्रिस स्मिथ और न्यूयॉर्क के डेमोक्रेट सांसद टॉम सुओजी ने मंगलवार को पेश किया। इस बिल का नाम 'टिब्‍बत एट्रोसिटीज डिटरमिनेशन एक्ट' है। अगर यह पास हो जाता है, तो विदेश मंत्री को एक साल के अंदर कांग्रेस को एक रिपोर्ट देनी होगी, जिसमें चीन की तिब्बत में की गई गतिविधियों का आकलन होगा।

यह बिल सीनेट में पहले से पेश किए गए एक दूसरे बिल का ही हाउस वर्जन है, जिसे रिपब्लिकन सीनेटर रिक स्कॉट और डेमोक्रेट सीनेटर जेफ मर्कले ने पेश किया था।

अगर यह कानून बन जाता है, तो अमेरिकी विदेश विभाग को यह जांच करनी होगी कि क्या चीनी अधिकारियों ने तिब्बतियों के खिलाफ मनमानी हत्याएं, गंभीर शारीरिक या मानसिक नुकसान, अमानवीय जीवन स्थितियां, जबरन विस्थापन, बड़े पैमाने पर हिरासत में लेना, जबरन नसबंदी और गर्भपात, और तिब्बती बच्चों को उनके परिवारों और समुदायों से अलग करने जैसे अत्याचार किए हैं।

इसके अलावा, यह भी देखा जाएगा कि चीन तिब्बती बौद्ध धर्म को अपने हिसाब से बदलने, तिब्बती भाषा और संस्कृति को दबाने की कोशिश कर रहा है या नहीं। रिपोर्ट में सरकारी जानकारी के साथ-साथ दूसरे स्वतंत्र स्रोतों की जानकारी भी शामिल होगी। साथ ही यह भी सुझाव दिए जाएंगे कि अमेरिका क्या कदम उठा सकता है, जैसे कि प्रतिबंध, वीजा रोकना या कूटनीतिक कार्रवाई करना।

क्रिस स्मिथ ने कहा कि चीन लंबे समय से तिब्बत में गंभीर अत्याचार करता आ रहा है और इसे अब और नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उनके मुताबिक, इन अपराधों को साफ तौर पर सामने लाना जरूरी है ताकि जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जा सके।

टॉम सुओजी ने कहा कि चीन की कार्रवाई सिर्फ तिब्बत ही नहीं बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए भी खतरा है। उन्होंने यह भी कहा कि तिब्बतियों, उइगर मुसलमानों और हांगकांग के लोकतंत्र समर्थकों के साथ हो रहे व्यवहार के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए और मानवाधिकारों की रक्षा करनी चाहिए।

सीनेटर रिक स्कॉट ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को तिब्बत में हो रहे कथित अत्याचारों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। उन्होंने चीन की सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वहां व्यवस्थित तरीके से हिंसा, यातना, जबरन नसबंदी और जबरन हिरासत जैसे काम किए जा रहे हैं।

इस प्रस्तावित कानून में यह भी कहा गया है कि विदेश विभाग को तिब्बती बच्चों को जबरन सरकारी बोर्डिंग स्कूलों में भेजने जैसे मामलों की भी जांच करनी होगी, जहां उनकी संस्कृति और पहचान को बदलने की कोशिश की जाती है।

तिब्बत लंबे समय से चीन और पश्चिमी देशों के बीच तनाव का एक बड़ा मुद्दा रहा है।

Source: IANS

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