भारत और अर्जेंटीना के बीच रणनीतिक सहयोग के नए अवसर: राजदूत कॉसिनो

नई द‍िल्‍ली, 5 जून । भारत अंतरराष्ट्रीय केंद्र में आयोजित भारत-लैटिन अमेरिका और कैरेबियन राउंडटेबल में बोलते हुए अर्जेंटीना के राजदूत मारियानो कॉसिनो ने भारत और अर्जेंटीना के बढ़ते संबंधों को दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण बताया है। उन्होंने भारत और अर्जेंटीना के बीच आपसी पूरकता का जिक्र करते हुए कहा कि भारत और हमें मिलकर काम करना है।

उन्होंने कहा कि दिल्ली और ब्यूनस आयर्स के बीच संबंध 'साझा हितों, समान मूल्यों और मजबूत आर्थिक पूरकता' पर आधारित हैं।

कॉसिनो ने बताया कि भारत अब अर्जेंटीना का छठा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बन चुका है। उन्होंने कहा कि हम दोनों देशों के बीच दूरी बहुत अध‍िक होने बाद भी हम दोनों आपसी लाभ के लिए आगे भी साथ मिलकर काम करते रहेंगे।

उन्होंने कहा, "हमारे देशों की राजनीतिक और राजनयिक व्यवस्था आज दुनिया में भारत के बढ़ते रणनीतिक महत्व को अच्छी तरह समझती है। भारत दुनिया की पांच सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो चुका है और सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है।"

उन्होंने कहा, "एशिया और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र दुनिया में लगातार अधिक महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं। हमें हमेशा याद रखना चाहिए कि दुनिया की लगभग 60 प्रतिशत आबादी इसी क्षेत्र में रहती है।"

कॉसिनो ने बताया कि खाद्य तेलों के मामले में अर्जेंटीना आज भारत का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है और भारत की खाद्य सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।

उन्होंने कहा कि 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के भारत के लक्ष्य को पूरा करने के लिए निवेश, खुलेपन और अधिक उदारीकरण की जरूरत है, जैसा कि प्रधानमंत्री मोदी भी कई बार कह चुके हैं। उनके अनुसार, इस दिशा में भारत और लैटिन अमेरिकी देशों के बीच अधिक सहयोग बहुत महत्वपूर्ण है।

राजदूत ने बताया कि 2009 में अर्जेंटीना ने मुंबई में अपना महावाणिज्य दूतावास खोला था, जो भारत की आर्थिक और वित्तीय राजधानी है। इसके बाद 2019 में भारत और अर्जेंटीना ने अपने संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक बढ़ाया। उसी वर्ष दिल्ली में एग्री दूतावास अधिकारी कार्यालय भी खोला गया, जिसका नेतृत्व कृषि व्यवसाय विशेषज्ञ मारियानो बेहेरान ने किया। इसके बाद अर्जेंटीना भारत को खाद्य तेलों का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता बन गया।

अर्जेंटीना मुख्य रूप से सोयाबीन तेल, सूरजमुखी तेल, दालें, चमड़ा और हाल के वर्षों में लिथियम तथा तांबे जैसे महत्वपूर्ण खनिज भारत को निर्यात करता है। ऊर्जा परिवर्तन और भारत की औद्योगिक जरूरतों के कारण इन क्षेत्रों का महत्व बढ़ा है। दूसरी ओर, भारत अर्जेंटीना को दवाइयां, रसायन, मशीनरी, मोटरसाइकिलें, ऑटो पार्ट्स और अन्य औद्योगिक उत्पाद निर्यात करता है।

अर्जेंटीना के राजदूत ने दोहराया कि "दोनों देश लोकतंत्र, स्वतंत्रता और मानव गरिमा के सम्मान जैसे साझा मूल्यों में विश्वास रखते हैं। साथ ही दोनों देश विकास के ऐसे रास्ते पर चल रहे हैं, जो मुक्त बाजार और सीमित सरकारी हस्तक्षेप के लाभों को समझता है।"

उन्होंने कहा, "जैसा कि प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में कहा था, हम इस विचार से सहमत हैं कि सरकारों को निजी पहल में कम से कम दखल देना चाहिए, लेकिन जरूरतमंद लोगों को अधिकतम सहायता प्रदान करनी चाहिए।"

राजदूत ने कहा कि "जुलाई 2025 में प्रधानमंत्री मोदी की अर्जेंटीना यात्रा हमारे संबंधों में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित हुई। 57 वर्षों में पहली बार किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने अर्जेंटीना की द्विपक्षीय यात्रा की थी।"

उन्होंने बताया कि हाल के वर्षों में भारतीय खनन कंपनियों का अर्जेंटीना में निवेश काफी बढ़ा है। कैटामार्का प्रांत में भारतीय कंपनियां न केवल लिथियम की खोज कर रही हैं, बल्कि तांबा और सोने में भी रुचि दिखा रही हैं।

उन्होंने कहा कि ये निवेश भारत के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि भारत इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) के विकास को आगे बढ़ा रहा है और इसके लिए आवश्यक महत्वपूर्ण खनिजों की मजबूत और विविध आपूर्ति शृंखला सुनिश्चित करना चाहता है।

Source: IANS

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