सोनम वांगचुक की पत्नी बोलीं- यह अंत नहीं है, शिक्षा में सुधार की मांग के लिए जारी रहेगा संघर्ष

नई दिल्ली, 20 जुलाई । कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के 'चलो संसद' मार्च के बीच सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि ने कहा कि यह आंदोलन केवल विरोध-प्रदर्शन या अनशन तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार और देश के भविष्य से जुड़े मुद्दों को उठाने का एक प्रयास है।

गीतांजलि ने कहा, "आज का दिन बहुत अहम है लेकिन यह अंत नहीं है। यह सिलसिला जारी रहेगा। जरूरी नहीं कि विरोध, प्रदर्शन और अनशन के जरिए ही लेकिन यह मांग बनी रहेगी कि शिक्षा और शिक्षा में सुधार का मुद्दा भारत का सबसे अहम मुद्दा बने, ताकि हमारे भारत के भविष्य को आगे बढ़ने के मौके मिलें। जिस मकसद के लिए उनका जन्म हुआ था, वे उस क्षमता को साकार कर सकें। तभी भारत दुनिया का लीडर और ग्लोबल गाइड बन पाएगा।

वहीं, कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने प्रदर्शन के दौरान अपनी मांगों को दोहराया। उन्होंने कहा कि उनकी प्रमुख मांगें स्पष्ट हैं। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को एक करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाना चाहिए। इसके अलावा उन्होंने सोनम वांगचुक को तुरंत रिहा करने की मांग भी रखी।

आजाद समाज पार्टी (केआर) के नेता और सांसद चंद्रशेखर आजाद रावण ने भी प्रदर्शन को समर्थन दिया। उन्होंने कहा कि देश का युवा अब अपने अधिकारों को लेकर जागरूक हो चुका है और अपनी आवाज उठाने के लिए सड़कों पर उतर रहा है।

चंद्रशेखर आजाद ने कहा, "देश का नौजवान अपना काम कर रहा है और पुलिस अपना कर्तव्य निभा रही है। लेकिन सच यह है कि युवाओं के अंदर जो डर था, वह अब खत्म हो चुका है। जब किसी व्यक्ति के अंदर से डर निकल जाता है तो वह अपने अधिकारों के लिए मजबूती से खड़ा होता है।"

उन्होंने सरकार से अपील की कि युवाओं की मांगों को गंभीरता से सुना जाए। उन्होंने कहा कि पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था और छात्रों के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर सरकार को जल्द फैसला लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि युवाओं की नाराजगी को नजरअंदाज करना किसी भी सरकार के लिए उचित नहीं होगा।

चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि उनकी पार्टी इस आंदोलन का समर्थन शुरू से करती रही है। उन्होंने बताया कि जब आंदोलन शुरू हुआ था, तभी से उनकी पार्टी के कार्यकर्ता इसमें शामिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की थी कि वे पार्टी के झंडे से ऊपर उठकर युवाओं के मुद्दे के समर्थन में आएं।

वहीं, सीपीआई (एम) नेता बृंदा करात ने भी प्रदर्शन को समर्थन देते हुए केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन सरकार की जवाबदेही और नागरिकों के प्रति उसकी जिम्मेदारी से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं ने लाखों छात्रों और युवाओं के भविष्य को प्रभावित किया है। इसी मुद्दे को लेकर धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की जा रही है।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार नागरिकों की समस्याओं और युवाओं के भविष्य को गंभीरता से नहीं ले रही है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सरकार की जिम्मेदारी जनता के प्रति जवाबदेह रहने की होती है और छात्रों से जुड़े मुद्दों पर संवेदनशीलता दिखानी चाहिए।

Source: IANS

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