बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप बढ़ा, 118 की मौत
बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। मंगलवार को देश के स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक (डीजीएचएस) ने बताया कि संदिग्ध मामलों और जटिलताओं के कारण 118 लोगों की मौत हो गई है, जिनमें अधिकतर बच्चे हैं।
ढाका, 7 अप्रैल। बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। मंगलवार को देश के स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक (डीजीएचएस) ने बताया कि संदिग्ध मामलों और जटिलताओं के कारण 118 लोगों की मौत हो गई है, जिनमें अधिकतर बच्चे हैं।
डीजीएचएस के मुताबिक, मृतकों की ये संख्या 15 मार्च से सोमवार सुबह तक रिकॉर्ड की गई। रविवार-सोमवार के बीच महज 24 घंटों में पांच लोगों की मौत हो गई थी।
हेल्थ एजेंसी ने बताया कि खसरे के संदिग्ध मरीजों की संख्या 2006 है और इनमें से अधिकतर बच्चे हैं जिनका देश के अलग-अलग अस्पतालों में इलाज चल रहा है।
रिपोर्ट्स से पता चलता है कि राजशाही मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल (आरएमसीएच) में संक्रामक बीमारी के लक्षणों से जूझ रहे दो और बच्चों की मौत हो गई, जिससे इस अस्पताल में मृतकों की कुल संख्या 42 हो गई है।
अस्पताल के प्रवक्ता शंकर कुमार बिस्वास के हवाले से बांग्लादेशी डेली ढाका ट्रिब्यून ने बताया कि दोनों बच्चों की मौत 24 घंटे (रविवार-सोमवार) के बीच हुई।
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि सिस्टम में सुधार के बिना, खसरे को नियंत्रित करने के लिए उठाए गए इमरजेंसी उपायों से कोई खास फायदा होने की संभावना नहीं है।
विशेषज्ञों और डीजीएचएस में डिजीज कंट्रोल की पूर्व निदेशक बेनजीर अहमद ने कहा कि मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार ने वैक्सीनेशन के लिए फंड देने वाले सेक्टोरल प्रोग्राम को अचानक रद्द कर दिया था। इसी वजह से मीजल्स वैक्सीन का संकट पैदा हो गया, जिससे कई बच्चों की मौत हो गई।
बांग्लादेश के जाने-माने अखबार डेली स्टार ने अहमद के हवाले से कहा, "जब हमें वर्ल्ड हेल्थ डे पर कुछ पॉजिटिव मनाना चाहिए, तो हमें एक आउटब्रेक से लड़ना पड़ रहा है, जो वाकई बहुत कष्टकारी है। हमें 2026 तक मीजल्स-रूबेला को खत्म करना है, लेकिन हम अस्पतालों में मीजल्स के बढ़ते मरीजों की संख्या से जूझ रहे हैं।"
इसके अलावा, 2024 के आखिर में प्लान किया गया इम्यूनाइजेशन का स्पेशल कैंपेन सियासी बदलाव के बीच नहीं चलाया जा सका।
हेल्थ अधिकारियों के मुताबिक, अंतरिम सरकार ने ऐसा कोई ड्राइव शुरू नहीं किया, जबकि शॉट लगाने वाले वर्कर 2025 में तीन बार हड़ताल पर चले गए, जिससे नियमित टीकाकरण कार्यक्रम में रुकावट आई।
डेली स्टार से नाम न बताने की शर्त पर एक और अधिकारी ने कहा कि फंड की कमी के कारण जनवरी से एक्सपैंडेड प्रोग्राम ऑन इम्यूनाइजेशन (ईपीआई) को कुछ इलाकों में वैक्सीन की राशनिंग करनी पड़ी।
एक और पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट, मुश्ताक हुसैन, ने कहा कि हालांकि सरकार ने मीजल्स के मामलों और मौतों में बढ़ोतरी को कंट्रोल करने के लिए इमरजेंसी वैक्सीनेशन कैंपेन चलाया है, लेकिन हेल्थ सेक्टर में लगातार तरक्की के लिए सुधार की जरूरत है।
मृतक संख्या बढ़ती देख, विशेषज्ञों ने सरकार से तुरंत कार्रवाई करने की अपील की है, और चेतावनी दी कि एक्शन न लेने पर मीजल्स भयंकर रूप धारण कर सकता है, क्योंकि एक मरीज 16 से 18 लोगों को संक्रमित कर सकता है।
Source: IANS