भारत यात्रा के बाद चीन पहुंचेंगे शिशिर खनल, वांग यी से करेंगे मुलाकात: रिपोर्ट

काठमांडू, 8 जून । नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनल भारत यात्रा समाप्त करने के बाद अगले सप्ताह चीन की यात्रा पर जाने वाले हैं। सोमवार को स्थानीय मीडिया ने इसकी जानकारी दी।

स्थानीय सूत्रों के हवाले से स्थानीय मीडिया पोर्टल ऑनलाइन खबर ने बताया कि खनल 14 जून को बीजिंग जाएंगे। आधिकारिक बैठक 15-16 जून को प्रस्तावित है।

इस दौरान नेपाल के विदेश मंत्री अपने चीनी समकक्ष वांग यी और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चीन के अंतरराष्ट्रीय विभाग प्रमुख ल्यू हाइशिंग से वार्ता कर सकते हैं।

खनल नेपाल के प्रवासियों से भी मुलाकात करेंगे। 17 जून को वो स्वदेश लौट आएंगे।

हालांकि नेपाल के विदेश मंत्रालय ने इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

भारत और चीन के बीच मौजूद नेपाल दोनों ही देशों से दोस्ताना संबंध बनाए रखना चाहता है। प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह लगातार इस बात पर जोर देते रहे हैं कि नेपाल अपनी विदेश नीति पर अडिग है; वह लंबे समय से चली आ रहे सिद्धांत पर कायम रहेगा।

वित्त वर्ष 2026–27 के वार्षिक बजट में नेपाल सरकार ने कहा है कि वह पारस्परिक लाभ, राष्ट्रीय गरिमा और संप्रभु हितों के आधार पर संतुलित विदेश संबंधों को मजबूत करेगी तथा आर्थिक समृद्धि को बढ़ावा देने के लिए सॉफ्ट पावर का उपयोग करेगी।

बजट दस्तावेज में कहा गया, “हम पारस्परिक लाभ, राष्ट्रीय गरिमा और संप्रभु हितों के आधार पर संतुलित विदेश संबंधों को मजबूत करेंगे तथा आर्थिक समृद्धि के लिए सॉफ्ट पावर का उपयोग करेंगे।”

चीन में नेपाल के पूर्व राजदूत बिष्णु पुकार श्रेष्ठ ने आईएएनएस से कहा, "ऐसे समय में जब चीन यह जानना चाहता है कि नई सरकार चीन से जुड़े मुद्दों को किस तरह देखती है, विदेश मंत्री खनल की यात्रा बीजिंग के लिए यह समझने में महत्वपूर्ण होगी कि नई सरकार चीन के मूल हितों पर क्या रुख रखती है।”

उन्होंने कहा, "तिब्बत और ताइवान चीन की दो प्रमुख सुरक्षा चिंताएं हैं और चीन नेपाल की किसी भी ऐसी सरकार के साथ काम करेगा जो ‘वन चाइना’ नीति का समर्थन करती हो।"

श्रेष्ठ ने यह भी कहा कि चीन चाहता है कि "बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई)" के तहत परियोजनाओं का क्रियान्वयन तेज़ी से हो, क्योंकि नेपाल में चिन्हित बीआरआई परियोजनाओं पर अब तक बहुत कम प्रगति हुई है।

उन्होंने कहा, “नेपाल के लिए कनेक्टिविटी, कम्युनिकेशन और क्लाइमेट इन तीन ‘सी’ क्षेत्रों में चीन का सहयोग महत्वपूर्ण है।”

इससे पहले, राष्ट्रीय राजनीतिक सहमति के लिए प्रसारित 'राष्ट्रीय प्रतिबद्धता पत्र' के मसौदे में सरकार ने कहा था कि वह इस विश्वास के आधार पर सभी देशों के साथ “समान दूरी और समान निकटता” की नीति अपनाएगी कि सैन्य गठबंधन, हथियारों की होड़ और युद्ध वैश्विक शांति को कमजोर करते हैं।

व्यवहारिक रूप से नेपाल के भारत के साथ बहुआयामी संबंध हैं, क्योंकि दोनों देशों के बीच साझा भौगोलिक, सांस्कृतिक और धार्मिक संबंध हैं तथा दोनों ही देशों में हिंदू बहुसंख्यक आबादी है।

नेपाल आगे भी ऐसी “संतुलित और गतिशील कूटनीति” अपनाएगा जिसका उद्देश्य बदलते वैश्विक भू-राजनीतिक माहौल को विकास के अवसरों में बदलना होगा। साथ ही, वह अपनी संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और राष्ट्रीय हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देगा।

सरकार ने त्रिपक्षीय आर्थिक साझेदारियों और क्षेत्रीय संपर्क को बढ़ावा देकर राष्ट्रीय हितों को आगे बढ़ाने तथा नेपाल को वैश्विक मंच पर एक स्वतंत्र, तटस्थ और गुटनिरपेक्ष राष्ट्र के रूप में स्थापित करने का संकल्प भी व्यक्त किया है।

खनल भारत की तीन दिवसीय यात्रा संपन्न कर रविवार को नेपाल लौट गए। बतौर विदेश मंत्री ये उनकी पहली द्विपक्षीय यात्रा थी। इस दौरान दोनों देशों के बीच क्रॉस सीमा-पार डिजिटल भुगतान प्रणाली (क्रॉस-बॉर्डर डिजिटल पेमेंट सिस्टम) समेत कई मुद्दों पर सहमति बनी।

Source: IANS

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