विज्ञान में महिलाओं का अंतरराष्ट्रीय दिवस, 'कल्पना-1' के बारे में

नई दिल्ली, 11 फरवरी। शिक्षा, सामाजिक जागरुकता और कई संस्थाओं के योगदान की वजह से महिलाओं की स्थिति सुधरती जा रही है। आज महिलाएं हर क्षेत्र में कमाल कर रही हैं। फिर बात विज्ञान की ही क्यों न हो? हर साल 11 फरवरी को 'विज्ञान में महिलाओं का अंतरराष्ट्रीय दिवस' दुनिया भर में मनाया जाता है। 

संयुक्त राष्ट्र महासभा ने साल 2015 में इसकी घोषणा की थी। यह दिन विज्ञान के क्षेत्र में महिलाओं के योगदान का जश्न मनाता है, जागरूकता बढ़ाता और मैसेज देता है कि वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए विज्ञान और लैंगिक समानता को साथ-साथ बढ़ावा देना जरूरी है।

यूनेस्को इस दिवस को बहुत महत्व देता है और जेंडर इक्वालिटी को अपनी प्राथमिकता मानता है। आज के दिन दुनिया भर में कई इवेंट होते हैं, जहां नई तकनीकों और स्टेम (साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग, मैथमेटिक्स) में लैंगिक अंतर को कम करने के उदाहरण साझा किए जा रहे हैं। यह दिन लड़कियों को स्टेम तकनीक में करियर चुनने के लिए प्रेरित करता है।

इस खास दिन पर भारतीय अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला की याद प्रासंगिक है। कल्पना चावला भारतीय मूल की अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री थीं, जिन्होंने नासा के साथ काम किया। दुर्भाग्य से 1 फरवरी 2003 को स्पेस शटल कोलंबिया दुर्घटना में उनकी जान चली गई। उनकी बहादुरी और योगदान को सम्मानित करने के लिए इसरो ने अपना पहला समर्पित मौसम उपग्रह उनके नाम पर रखा और नाम रखा।

कल्पना-1 उपग्रह (मूल नाम मेटसैट-1) 12 सितंबर 2002 को श्रीहरिकोटा से पीएसएलवी-सी4 रॉकेट से लॉन्च किया गया था। 5 फरवरी 2003 को प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने इसे कल्पना-1 नाम दिया। यह भारत का पहला जियोस्टेशनरी मौसम उपग्रह है, जो 74 डिग्री पूर्वी देशांतर पर स्थित है।

कल्पना-1 सैटेलाइट कई खूबियों से लैस है, इसका वजन लॉन्च के समय 1060 किलोग्राम (सूखा वजन 498 किग्रा) और पावर 550 वाट था। मिशन की लाइफ 7 साल थी लेकिन यह 15 साल से ज्यादा चला। इसके मुख्य उपकरणों में वेरी हाई रेजोल्यूशन रेडियोमीटर जो दृश्य, इंफ्रारेड और थर्मल इंफ्रारेड में 2 किमी रेजोल्यूशन वाली तस्वीरें लेता है, डेटा रिले ट्रांसपोंडर, जो मौसम स्टेशनों से डेटा इकट्ठा करता है शामिल रहा।

कल्पना-1 बादलों, जलवाष्प, तापमान और वायुमंडल की जानकारी देने में सफल रहा, जिससे मौसम पूर्वानुमान, जलवायु अध्ययन और आपदा प्रबंधन में मदद मिलती है। यह इसरो के मौसम सैटेलाइट सीरीज की शुरुआत थी।

Source: IANS

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