संयुक्त राष्ट्र में पी हरीश की पाकिस्तान को चेतावनी, सीमा पार आतंकवाद के भुगतने होंगे परिणाम
भारत ने पाकिस्तान को सीमा पार आतंकवाद को लेकर कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर वह आतंकवाद को समर्थन देना जारी रखता है, तो उसे इसके परिणाम भुगतने होंगे।।

संयुक्त राष्ट्र, 27 मई । भारत ने पाकिस्तान को सीमा पार आतंकवाद को लेकर कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर वह आतंकवाद को समर्थन देना जारी रखता है, तो उसे इसके परिणाम भुगतने होंगे।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने मंगलवार को सुरक्षा परिषद में कहा, ''पाकिस्तान को हर तरह के आतंकवाद को समर्थन देना पूरी तरह और हमेशा के लिए बंद करना होगा।''
उन्होंने कहा, ''पाकिस्तान को यह स्वीकार करना होगा कि सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देने के परिणाम होते हैं। भारत को ऐसे सीमा पार आतंकवाद से अपनी रक्षा करने का पूरा अधिकार है।''
उन्होंने यह बयान पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि आसिम इफ्तिखार अहमद के उस भाषण के जवाब में दिया, जिसमें उन्होंने सुरक्षा परिषद की बैठक के दौरान भारत के खिलाफ टिप्पणी की थी। यह बैठक संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उद्देश्यों और सिद्धांतों को मजबूत करने को लेकर आयोजित की गई थी।
हरीश ने पाकिस्तान के संयुक्त राष्ट्र चार्टर का सम्मान करने के दावे पर भी निशाना साधा।
उन्होंने कहा, ''पाकिस्तान द्वारा सीमा पार आतंकवाद का इस्तेमाल और भारत को 'हजार घाव देकर कमजोर करने' की नीति उसके खोखले दावों और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के प्रति उसकी कथित प्रतिबद्धता को उजागर करती है। पाकिस्तान अपने गठन के समय से ही आतंकवाद, धार्मिक कट्टरता, हिंसक उग्रवाद और भारत विरोधी बयानबाजी को लगातार बढ़ावा देता रहा है।''
इस दौरान आसिम इफ्तिखार अहमद ने दावा किया कि कश्मीर मुद्दा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों के बावजूद अब तक हल नहीं हो पाया है और इसके लिए उन्होंने भारत की ओर इशारा किया। उन्होंने कहा, ''करीब आठ दशक से जम्मू-कश्मीर मुद्दा अनसुलझा है, जबकि सुरक्षा परिषद के कई प्रस्ताव कश्मीरी लोगों को आत्मनिर्णय का अधिकार देने की बात करते हैं।''
हालांकि, सुरक्षा परिषद की मूल शर्तों का पालन पाकिस्तान ने खुद नहीं किया। 21 अप्रैल 1948 को पारित संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 47 में पाकिस्तान से कहा गया था कि वह कश्मीर से अपने सभी कबायली लड़ाकों, छिपे हुए सैनिकों और नागरिकों को हटाए, लेकिन पाकिस्तान ने इन मांगों का पालन नहीं किया। इसके कारण कश्मीर पर संयुक्त राष्ट्र की भूमिका धीरे-धीरे खत्म हो गई।
हरीश ने कहा, ''जम्मू-कश्मीर कानूनी और स्थायी रूप से भारत का हिस्सा है।''
उन्होंने कहा, ''पाकिस्तान ने कई युद्ध छेड़कर, बिना उकसावे के भारत पर हमला कर और लगातार सीमा पार आतंकवाद को समर्थन देकर संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के सिद्धांतों का उल्लंघन किया है।''
कश्मीर को लेकर अपने पुराने रुख पर कायम पाकिस्तान ने बैठक खत्म होने से ठीक पहले फिर जवाब देने के अधिकार का इस्तेमाल किया और पहले से तैयार बयान पढ़ा, जिसमें उसने 'हिंदुत्व' पर भी हमला बोला। भारत ने इन टिप्पणियों को कोई महत्व नहीं दिया और उनका जवाब देना जरूरी नहीं समझा।
Source: IANS
