कमजोर वैश्विक संकेतों के बावजूद भारतीय स्मॉल-कैप शेयरों ने अप्रैल में किया मजबूत प्रदर्शन: रिपोर्ट

नई दिल्ली, 2 मई । शनिवार को जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी-ईरान संघर्ष के कारण कमजोर वैश्विक आर्थिक स्थिति के बावजूद भारतीय शेयर बाजार ने अप्रैल में सभी सेगमेंट में मजबूत रिटर्न दिया, जिसमें छोटी कंपनियों के शेयरों ने सबसे ज्यादा तेजी दिखाई।

ओमनीसाइंस कैपिटल की रिपोर्ट में कहा गया है कि निफ्टी स्मॉलकैप 250 इंडेक्स ने 13.4 प्रतिशत और निफ्टी माइक्रोकैप 250 इंडेक्स ने 16.2 प्रतिशत का शानदार रिटर्न दिया।

कंपनी ने बताया कि उसके 'भारत वेक्टर्स' फ्रेमवर्क, जिसमें करीब 1,500 निवेश योग्य कंपनियां शामिल हैं, के अनुसार छोटे मार्केट-कैप वाली कंपनियों ने बेहतर प्रदर्शन किया।

लगभग 1,500 करोड़ रुपए औसत मार्केट कैप वाली 250 कंपनियों और करीब 3,000 करोड़ रुपए मार्केट कैप वाली 250 कंपनियों ने क्रमशः 25.2 प्रतिशत और 23.2 प्रतिशत का रिटर्न दिया।

रिपोर्ट में कहा गया कि भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी, महंगाई, रुपए की कमजोरी और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली जैसी चिंताओं के बावजूद घरेलू बाजार ने अच्छा प्रदर्शन किया।

यह तेजी कमजोर आर्थिक संकेतकों के बावजूद आई, जिससे यह साफ होता है कि लंबे समय में शेयर बाजार कंपनियों की मूलभूत स्थिति (फंडामेंटल्स) पर आधारित होता है।

रिपोर्ट के अनुसार, यह तेजी कंपनियों के असली प्रदर्शन में सुधार की बजाय उनके वैल्यूएशन (मूल्यांकन) बढ़ने की वजह से आई है।

ओमनीसाइंस कैपिटल के सीईओ और चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट डॉ. विकास गुप्ता ने कहा कि बाजार एक जादूगर की तरह होता है, जो निवेशकों का ध्यान मैक्रो फैक्टर्स पर लगाता है, जबकि असली कमाई फंडामेंटल्स और सही वैल्यूएशन से होती है।

सभी सेक्टर्स में रिटर्न ऑन इक्विटी (आरओई), लेवरेज और ग्रोथ की उम्मीदों में ज्यादा बदलाव नहीं आया है, जिससे पता चलता है कि कंपनियों के मूल प्रदर्शन में कोई बड़ा सुधार नहीं हुआ है।

प्राइस-टू-अर्निंग (पी/ई) और प्राइस-टू-बुक (पी/बी) जैसे वैल्यूएशन तेजी से बढ़े हैं, जिससे संकेत मिलता है कि बाजार अब कंपनियों की मौजूदा ताकत के हिसाब से उनकी कीमत तय कर रहा है।

कंपनी के प्रेसिडेंट और चीफ पोर्टफोलियो मैनेजर अश्विनी शमी ने कहा कि बाजार में निवेश के अवसर हैं, लेकिन निवेशकों को कम कर्ज, ज्यादा आरओई, मजबूत ग्रोथ और उचित वैल्यूएशन वाली कंपनियों पर ध्यान देना चाहिए।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) लगातार बिकवाली कर रहे हैं। कैलेंडर वर्ष 2026 में अब तक लगभग 1.75 लाख करोड़ रुपए की निकासी हो चुकी है, जिसमें अप्रैल में करीब 44,000 करोड़ रुपए शामिल हैं।

Source: IANS

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