मारुति सुजुकी ने एंट्री लेवल की गाड़ियों के लिए प्राइस प्रोटेक्शन स्कीम का किया ऐलान

नई दिल्ली, 9 जून । मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड ने मंगलवार को कीमतों में बढ़ोतरी से ग्राहकों को बचाने के लिए एंट्री लेवल की गाड़ियों के लिए प्राइस प्रोटेक्शन स्कीम का ऐलान किया।

इसके जरिए कंपनी की कोशिश पहली बार गाड़ी खरीदने वालों के लिए कीमतों को कम रखना है।

देश की सबसे बड़ी कार बनाने वाली कंपनी ने कहा है कि जो ग्राहक 14 जून, 2026 या उससे पहले अपनी गाड़ियां बुक करेंगे, उनके लिए मारुति सुजुकी ऑल्टो के10, मारुति सुजुकी एस-प्रेसो, मारुति सुजुकी सेलेरियो और मारुति सुजुकी वैगन-आर जैसे छोटे कार मॉडल की कीमतें स्थिर रहेंगी।

यह घोषणा कंपनी के उस ऐलान के कुछ हफ्ते बाद आई है जिसमें उसने कहा था कि महंगाई के दबाव और लागत बढ़ने की वजह से जून 2026 से वह अपने सभी मॉडलों की कीमतें 30,000 रुपए तक बढ़ा देगी।

इस कदम के पीछे की वजह बताते हुए मारुति सुजुकी के मार्केटिंग और सेल्स के सीनियर एग्जीक्यूटिव ऑफिसर पार्थो बनर्जी ने कहा कि कंपनी को अपने डीलर नेटवर्क से फीडबैक मिला है, जिसमें एंट्री-लेवल ग्राहकों की चिंताओं का जिक्र किया गया है।

उन्होंने कहा कि गाड़ी की ज्यादा कीमतों की वजह से पहली बार गाड़ी खरीदने वाले कई लोग पीछे हट सकते हैं, और कंपनी उन ग्राहकों को कुछ राहत देना चाहती है जिन्होंने पहले ही कार खरीदने का फैसला कर लिया है।

कंपनी ने कहा कि प्राइस प्रोटेक्शन पहल का मकसद छोटी कारों के सेगमेंट में कीमतों को किफायती बनाए रखना है, ऐसे समय में जब इनपुट कॉस्ट बढ़ने से गाड़ियों की कीमतों पर दबाव बढ़ रहा है।

कंपनी ने आगे कहा कि यह स्कीम देश भर में मोटर-वाहन के इस्तेमाल को बढ़ावा देने और पहली बार गाड़ी खरीदने वालों की मदद करने की एक बड़ी कोशिश का हिस्सा है।

इसके अतिरिक्त, मारुति सुजुकी ने "सुहाना सफर" नाम से एक नया रिकरिंग डिपॉजिट-बेस्ड ऑटो लोन प्रोग्राम शुरू किया है। यह उन ग्राहकों की मदद के लिए है जिन्हें डाउन पेमेंट का इंतजाम करने या हर महीने लोन की किस्तें चुकाने में मुश्किल होती है।

यह स्कीम ज्वेलरी सेक्टर में आम तौर पर देखी जाने वाली सेविंग्स-लिंक्ड स्कीम से प्रेरित है और अभी इसमें ऑल्टो के10, एस-प्रेसो, सेलेरियो और वैगन-आर मॉडल शामिल हैं।

इस प्रोग्राम के तहत, ग्राहक एक रिकरिंग डिपॉजिट अकाउंट में हर महीने उतनी रकम जमा कर सकते हैं जितनी उनकी संभावित ईएमआई होगी।

जमा की गई रकम पर ब्याज मिलता है और तीन से छह महीने की अवधि पूरी होने के बाद, इस रकम का इस्तेमाल उसी बैंक से गाड़ी के लोन के लिए डाउन पेमेंट के तौर पर किया जा सकता है।

Source: IANS

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