सेबी ने कर्मचारियों के लिए सख्त किए नियम, शेयर बाजार में निवेश और नौकरी बदलने पर बढ़ी निगरानी

नई दिल्ली, 13 जुलाई । सेबी यानी भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (एसईबीआई) ने अपने कर्मचारियों के लिए सेवा नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए आचार संहिता को और सख्त बना दिया है। नए नियमों के तहत हितों के टकराव को रोकने, निवेश पर निगरानी बढ़ाने और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कई महत्वपूर्ण प्रावधान लागू किए गए हैं।

सेबी ने एसईबीआई (कर्मचारी सेवा) (संशोधन) विनियम, 2026 को अधिसूचित करते हुए कर्मचारियों के निवेश, खुलासे और नौकरी से जुड़े नियमों में व्यापक बदलाव किए हैं।

नए नियमों के तहत सेबी ने 'परिवार' और 'आश्रित' की परिभाषा का विस्तार किया है। अब इसमें गोद लिए गए बच्चे, सौतेले बच्चे और ऐसे व्यक्ति भी शामिल होंगे, जो किसी कर्मचारी पर काफी हद तक आर्थिक रूप से निर्भर हैं।

इस बदलाव के बाद निवेश, खुलासे और अन्य सेवा संबंधी नियमों का दायरा भी पहले से व्यापक हो जाएगा।

संशोधित नियमों के अनुसार, सेबी से इस्तीफा देने या रिटायर होने वाले कर्मचारियों पर दो साल का 'कूलिंग-ऑफ पीरियड' लागू होगा। इस अवधि के दौरान पूर्व कर्मचारी किसी भी व्यक्ति या संस्था की ओर से सेबी के समक्ष किसी मामले में पैरवी नहीं कर सकेंगे। यह प्रतिबंध जांच, सुनवाई, सेटलमेंट और विभिन्न मंजूरियों से जुड़े मामलों पर लागू होगा।

यदि कोई सेबी कर्मचारी किसी अन्य संस्थान या कंपनी में नौकरी के लिए बातचीत शुरू करता है, तो उसे एक महीने के भीतर इसकी जानकारी सेबी को देनी होगी।

इस कदम का उद्देश्य संभावित हितों के टकराव को रोकना और नियामकीय पारदर्शिता को मजबूत करना है।

सेबी ने अपने कर्मचारियों के निवेश नियम भी काफी सख्त कर दिए हैं। नए नियमों के तहत कर्मचारी और उनके परिवार के सदस्य नौकरी के दौरान शेयर, इक्विटी में परिवर्तनीय प्रतिभूतियों और डेरिवेटिव्स में कोई नया निवेश नहीं कर सकेंगे।

हालांकि, म्यूचुअल फंड, रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (रीट्स) जैसे विनियमित सामूहिक निवेश साधनों में निवेश की अनुमति पहले की तरह जारी रहेगी।

सेबी ने कुछ नियामित निवेश उत्पादों में निवेश की अधिकतम सीमा भी तय कर दी है।

नए नियमों के अनुसार, ऐसे निवेश किसी कर्मचारी के कुल निवेश पोर्टफोलियो के 25 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकेंगे।

हालांकि, कुछ मामलों में छूट दी गई है, जिनमें कर्मचारी के जीवनसाथी को मिले एम्प्लॉई स्टॉक ऑप्शन (ईएसओपी) और विवेकाधीन पोर्टफोलियो प्रबंधन सेवाओं के तहत किए गए निवेश शामिल हैं।

इसके अलावा, सेबी ने उपहार से जुड़े नियमों में भी संशोधन किया है। अब कर्मचारियों को 50,000 रुपए तक के उपहार की रिपोर्ट करने की जरूरत नहीं होगी। पहले यह सीमा 10,000 रुपए थी।

इसके साथ ही, नियामक ने यह भी स्पष्ट किया है कि परंपरागत और सामाजिक अवसरों पर मिलने वाले किन उपहारों को नियमों के तहत स्वीकार किया जा सकता है।

Source: IANS

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