वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से आईओसीएल, बीपीसीएल और एचपीसीएल के शेयरों में आई जोरदार तेजी

मुंबई, 17 जून । वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में लगातार गिरावट और भू-राजनीतिक तनाव कम होने के संकेतों के बीच बुधवार को सरकारी तेल विपणन कंपनियों के शेयरों में अच्छी तेजी देखने को मिली।

दिन के कारोबार में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) पर हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) का शेयर 2 प्रतिशत से ज्यादा बढ़कर 410.50 रुपए के दिन के उच्चतम स्तर पर पहुंच गए।

इसी तरह भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) के शेयर 2.46 प्रतिशत की बढ़त के साथ 319.50 रुपए के इंट्रा-डे हाई तक पहुंच गया।

वहीं, इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल) के शेयर में भी 1.61 प्रतिशत की तेजी आई और यह 147.47 रुपए के दिन के उच्च स्तर पर पहुंच गए।

तेल विपणन कंपनियों के शेयरों में यह तेजी ऐसे समय आई है जब कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई है। बाजार को उम्मीद है कि अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित समझौते के बाद ईरान का तेल निर्यात बढ़ सकता है, जिससे वैश्विक बाजार में आपूर्ति संबंधी चिंताएं कम होंगी।

अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड की कीमत 80 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गई और यह पिछले तीन महीनों के निचले स्तर के आसपास कारोबार कर रही थी। पिछले कुछ कारोबारी सत्रों में इसमें तेज गिरावट देखने को मिली है।

वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) कच्चा तेल भी लगभग 1 प्रतिशत गिरकर 75 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा था।

रिपोर्टों के अनुसार, अंतरिम समझौते के तहत ईरान को फिर से कच्चे तेल की बिक्री की अनुमति मिल सकती है। साथ ही यह समझौता दोनों पक्षों के बीच व्यापक बातचीत का रास्ता भी तैयार करेगा, जिसका उद्देश्य संघर्ष समाप्त करना और ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी चिंताओं का समाधान निकालना है।

इसके अलावा, इस प्रस्तावित व्यवस्था से होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से पूरी तरह खोलने में मदद मिलने की उम्मीद है, जो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग माना जाता है। इसके खुलने से क्षेत्र में व्यापारिक जहाजों की आवाजाही भी आसान हो जाएगी।

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले पांच दिनों में ब्रेंट क्रूड की कीमत में लगभग 16 प्रतिशत की गिरावट आई है और यह करीब 79 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई है। इससे भारत के लिए बढ़ते भुगतान संतुलन (बीओपी) घाटे की बड़ी चिंता काफी हद तक कम हो गई है।

विशेषज्ञों के अनुसार, बाजार के नजरिए से एक और सकारात्मक संकेत विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की बिकवाली में कमी आना है। यह रुझान आगे भी जारी रह सकता है क्योंकि भारतीय रुपया लगातार मजबूत हो रहा है और उसमें आगे भी मजबूती आने की संभावना है।

बुधवार को ऊर्जा कीमतों को लेकर चिंता कम होने और वैश्विक निवेशकों के बेहतर रुख के कारण लगातार चौथे कारोबारी सत्र में घरेलू शेयर बाजार बढ़त के साथ कारोबार करता दिखाई दिया और हरे निशान में बंद होने में सफल रहा।

Source: IANS

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