भारत वैश्विक उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स चैंपियन बनने की राह पर है: नथिंग सीईओ
उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी नथिंग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) कार्ल पेई ने सोमवार को कहा कि भारत अपने वैश्विक उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स चैंपियन तैयार करने की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहा है।

नई दिल्ली, 21 सितंबर । उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी नथिंग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) कार्ल पेई ने सोमवार को कहा कि भारत अपने वैश्विक उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स चैंपियन तैयार करने की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि देश का विशाल स्मार्टफोन बाजार, युवा आबादी, मजबूत विनिर्माण आधार और तकनीकी प्रतिभा का बड़ा भंडार भारत को इस दिशा में मजबूत स्थिति में खड़ा करता है।
कार्ल पेई ने कहा कि जापान, दक्षिण कोरिया और चीन जैसे देशों ने पहले बड़े पैमाने पर उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण विकसित किया और बाद में अपने वैश्विक ब्रांड खड़े किए। उन्होंने कहा कि भारत भी अब उसी तरह के एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है।
उन्होंने कहा कि भारत आज दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा स्मार्टफोन विनिर्माण केंद्र है और यहां बड़ी संख्या में युवा प्रतिभाएं तथा मजबूत सॉफ्टवेयर विशेषज्ञता मौजूद है। हालांकि उनका मानना है कि भारत के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती विनिर्माण नहीं, बल्कि स्वदेशी अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) क्षमताओं को मजबूत करना है।
कार्ल पेई के मुताबिक, किसी कंपनी की दीर्घकालिक सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि वह अपने उत्पादों को स्वयं विकसित और लगातार बेहतर बनाने की क्षमता रखती है या नहीं। उन्होंने कहा कि वास्तविक आरएंडडी क्षमता ही उन कंपनियों को अलग पहचान देती है जो लंबे समय तक विकास कर सकती हैं, जबकि केवल विनिर्माण साझेदारों पर निर्भर कंपनियां टिकाऊ बढ़त हासिल नहीं कर पातीं।
उन्होंने कहा, "भारत वैश्विक उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियां जरूर बनाएगा। सवाल केवल यह है कि कब और कौन उन्हें बनाएगा।"
नथिंग के प्रमुख ने बताया कि कंपनी इस दिशा में योगदान देने के लिए अपने सीएमएफ ब्रांड को एक स्वतंत्र भारतीय कंपनी के रूप में विकसित करने की योजना बना रही है। यह नई इकाई भारत केंद्रित होगी, जिसमें भारतीय स्वामित्व बहुमत में रहेगा और इसकी अपनी टीम तथा आरएंडडी क्षमताएं भारत में विकसित की जाएंगी। नथिंग इस कंपनी में साझेदार और शेयरधारक बनी रहेगी।
कार्ल पेई ने कहा कि चीन में 8 आठ वर्षों तक काम करने के अनुभव ने उन्हें यह समझने का अवसर दिया कि किस प्रकार एक विनिर्माण इकोसिस्टम समय के साथ वैश्विक उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स शक्ति में बदल सकता है। इसी अनुभव ने उन्हें विश्वास दिलाया है कि भारत भी समान राह पर आगे बढ़ सकता है, बशर्ते कंपनियां केवल असेंबली पर नहीं बल्कि इंजीनियरिंग, डिजाइन और उत्पाद विकास पर भी निवेश करें।
उन्होंने याद दिलाया कि वर्ष 2015 के आसपास भारतीय स्मार्टफोन बाजार में घरेलू ब्रांडों की हिस्सेदारी लगभग आधी थी और एक भारतीय कंपनी कुछ समय के लिए सैमसंग को पीछे छोड़कर देश की सबसे ज्यादा बिकने वाली स्मार्टफोन ब्रांड भी बनी थी।
कार्ल पेई के अनुसार, भारतीय ब्रांडों के लिए अगला बड़ा अवसर अपने उत्पादों को खुद विकसित करने की क्षमता पर निर्भर करेगा। उन्होंने कहा, "मैन्युफैक्चरिंग पहला चरण है, दूसरा चरण आरएंडडी है।"
साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि भारत के पास पहले से ही वह औद्योगिक आधार मौजूद है, जिसकी जरूरत वैश्विक स्तर की इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियां खड़ी करने के लिए होती है।
Source: IANS

