असम सरकार बाढ़ राहत के लिए 72 यूट्यूबरों द्वारा इकट्ठा किए गए फंड की

गुवाहाटी, 12 अगस्त । असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने बुधवार को कहा कि राज्य सरकार बाढ़ राहत के लिए असम और राज्य के बाहर के 72 यूट्यूबर्स द्वारा जुटाए गए फंड की जांच करेगी और यह पता लगाएगी कि क्या पैसा राज्य तक पहुंचा है और उसका इस्तेमाल कैसे किया गया है।

मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि सरकार उन लोगों और कंटेंट क्रिएटर्स की तारीफ करती है जिन्होंने बाढ़ से प्रभावित लोगों के लिए संसाधन जुटाए हैं, लेकिन उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पारदर्शिता बनाए रखने और राहत कार्यों के दोहराव को रोकने के लिए फंड का सही हिसाब-किताब जरूरी है।

मुख्यमंत्री ने कहा, "72 यूट्यूबर्स ने राज्य के बाहर से फंड इकट्ठा किया है। हम यह पता लगा रहे हैं कि फंड राज्य तक पहुंचा है या नहीं।" उन्होंने कहा कि सरकार उन लोगों से जानकारी मांगेगी जिन्होंने चंदा इकट्ठा किया है कि पैसा किस तरह और कहां खर्च किया गया।

मुख्यमंत्री सरमा ने कहा, "कई लोगों ने योगदान देना शुरू कर दिया है, लेकिन हम उनसे पूछेंगे कि उन्होंने फंड का इस्तेमाल कहां किया है। हम पूछेंगे कि इसका इस्तेमाल कहां हुआ है ताकि कोई दोहराव न हो।"

उन्होंने असम के यूट्यूबर और जमीनी स्तर पर राहत कार्य करने वाले समय गोगोई की भी बाढ़ प्रभावित समुदायों की मदद करने के प्रयासों के लिए तारीफ की। सरमा ने कहा, "समय गोगोई ने अच्छा काम किया है" और कई अन्य लोग भी राहत कार्यों में मदद के लिए आगे आए हैं।

मुख्यमंत्री के अनुसार, सरकार बाढ़ राहत कार्यों में शामिल यूट्यूबर्स और अन्य लोगों के योगदान को मान्यता देने और उन्हें पारंपरिक असमिया गमोसा से सम्मानित करने की योजना बना रही है। हालांकि, उन्होंने कहा कि फंड के इस्तेमाल की पहले जांच की जाएगी।

मुख्यमंत्री सरमा नेकहा कि असम पुलिस का साइबर सेल फंड इकट्ठा करने की गतिविधियों से जुड़े अकाउंट्स पर नजर रख रहा है।

गोगोई बाढ़ के दौरान जमीनी स्तर पर राहत कार्य करने वाले एक प्रमुख व्यक्ति के रूप में उभरे हैं। उन्होंने अपनी निजी बचत का इस्तेमाल किया और अलग-थलग पड़े और प्रभावित गांवों के निवासियों को भोजन, पीने का पानी और दवाएं उपलब्ध कराने के लिए संसाधन जुटाए। उन्होंने 'प्रोजेक्ट गोल्डन असम' पहल के जरिए फंसे हुए जानवरों को बचाने और क्षतिग्रस्त घरों को फिर से बनाने में भी हिस्सा लिया है।

राज्य सरकार का यह कदम निजी तौर पर फंड इकट्ठा करने और स्वयंसेवकों द्वारा चलाए जा रहे राहत कार्यों में तेज़ी के बीच उठाया गया है, क्योंकि असम के कुछ हिस्सों में भीषण बाढ़ का असर जारी है।

जांच प्रक्रिया का मकसद सरकारी और निजी राहत पहलों के बीच बेहतर तालमेल बिठाना और यह सुनिश्चित करना है कि चंदा बिना किसी दोहराव या कमी के प्रभावित लोगों तक पहुंचे।

Source: IANS

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