जयपुर के मोती डूंगरी गणेश मंदिर में सिंधारा रस्म के लिए जुटे अविवाहित

जयपुर, 13 सितंबर । राजधानी जयपुर स्थित मोती डूंगरी गणेश मंदिर में गणेश चतुर्थी से पहले सिंधारा (सिंजारा) रस्म के लिए बड़ी संख्या में अविवाहित लाइन में लगने लगे हैं। सिंधारा जयपुर की पुरानी परंपरा है। जहां जन्म होने या शादी होने पर नए वस्त्र और मेहंदी चढ़ाई जाती है।

मंदिर के पुजारी अभिषेक शर्मा ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा, "मोतीडूंगरी गणेश मंदिर में सिंधारा रस्म शाम 6:30 बजे से मनाया जाएगा। आज शाम भगवान को नई पोशाक और मुकुट धारण कराया जाएगा। जिसके बाद प्रसाद रूपी मेहंदी वितरण की जाएगी। भगवान को चढ़ाए जाने के बाद मेहंदी भक्तजनों को दी जाती है।"

अभिषेक शर्मा ने बताया कि मान्यता है कि मेहंदी सिधारे पर भक्त जो भी मनोकामना लेकर आते हैं, वह पूरी हो जाती है। मेहंदी का संबंध विवाह से होता है, इसलिए जो विवाह करने की सोच रहे हैं और जिनका विवाह काफी समय से नहीं हुआ है और जो विवाह योग्य हैं, अगर वे हाथों पर ये मेहंदी रचाते हैं, तो माना जाता है कि एक वर्ष के अंदर विवाह संपन्न हो जाता है। आज का असली प्रसाद मेहंदी ही है। ऐसे में हम लोग जितनी मेहंदी बांट सकते हैं, उतनी बांटने की कोशिश की है।

मंदिर के पुजारी ने बताया कि 3500 किलो मेहंदी आई है। देखा जा सकता है कि दर्शनार्थियों का तांता लगा हुआ है। 8 जगहों पर मेहंदी बांटी जाएगी। ऐसे में हमारी कोशिश है कि ज्यादा से ज्यादा लोगों को बांटी जाए।

14 सितंबर को गणेश चतुर्थी मनाई जाएगी। देशभर में इसकी तैयारी धूमधाम से की जा रही है। इस दिन गणपति स्थापना सुबह 11:02 बजे से दोपहर 1:31 बजे तक करना शुभ रहेगा। गणेश चतुर्थी से गणेश उत्वस का शुभारंभ होता है और अनंत चतुर्दशी के दिन इस पर्व का समापन होता है। सुख, शांत-समृद्धि और जीवन के संकट से दूर होने के लिए भगवान गणेश की पूजा की जाती है।

Source: IANS

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