सीएम उमर अब्दुल्ला ने खीर भवानी मेले की तैयारी का लिया जायजा, 22 जून से पहले सभी व्यवस्थाएं पूरी करने का आश्वासन

श्रीनगर, 18 जून । जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने गुरुवार को गांदरबल जिले के तुलमुला में आयोजित होने वाले माता खीर भवानी मेले की तैयारियों की समीक्षा की।

अधिकारियों ने बताया कि जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री और गांदरबल के विधायक उमर अब्दुल्ला ने गुरुवार को वार्षिक खीर भवानी मेले की तैयारियों का जायजा लिया और आश्वासन दिया कि 22 जून को होने वाले इस धार्मिक आयोजन से पहले सभी लंबित कार्य और जरूरी व्यवस्थाएं पूरी कर ली जाएंगी।

गांदरबल जिले स्थित खीर भवानी मंदिर के पवित्र स्थल के दौरे के दौरान सीएम उमर अब्दुल्ला ने देश और विदेश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए की जा रही व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। श्रद्धालु हर वर्ष आयोजित होने वाले इस मेले में भाग लेने और देवी का आशीर्वाद लेने के लिए यहां पहुंचते हैं।

पत्रकारों से बातचीत में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि 22 जून को खीर भवानी मेले का पावन अवसर है, जिसमें दुनिया भर से श्रद्धालु शामिल होते हैं।

उन्होंने कहा कि स्थानीय विधायक होने के नाते उन्होंने स्वयं मंदिर पहुंचकर व्यवस्थाओं का आकलन किया और विभिन्न विभागों की तैयारियों की समीक्षा की।

सीएम ने बताया कि उन्होंने मंदिर के पुजारियों और अन्य संबंधित लोगों से बातचीत कर उनकी आवश्यकताओं और चिंताओं को समझा। उन्होंने कहा कि कुछ जरूरी कार्य अभी बाकी हैं और प्रशासन मेले के शुरू होने से पहले उन्हें पूरा करने का हरसंभव प्रयास करेगा।

मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि श्रद्धालुओं के लिए सुचारु व्यवस्थाएं सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिकता है और संबंधित अधिकारियों को शेष कार्य तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।

उन्होंने विश्वास जताया कि मेले के शुरू होने से पहले श्रद्धालुओं के लिए सभी आवश्यक सुविधाएं, बुनियादी व्यवस्थाएं और अन्य जरूरी सहायता उपलब्ध करा दी जाएगी।

वार्षिक खीर भवानी मेला कश्मीरी पंडित समुदाय के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजनों में से एक है। हर वर्ष गांदरबल जिले के तुलमुला स्थित इस ऐतिहासिक मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।

माता राग्न्या देवी के पवित्र मंदिर में ज्येष्ठ अष्टमी के अवसर पर खीर भवानी मेले का आयोजन किया जाता है। यह कश्मीरी पंडित समुदाय के सबसे बड़े और महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजनों में से एक माना जाता है।

मुख्य मेला 22 जून को तुलमुला में आयोजित होगा। इसके अलावा कश्मीर घाटी के अन्य क्षेत्रों जैसे कुपवाड़ा, अनंतनाग और कुलगाम में भी इससे जुड़े धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

देशभर से हजारों श्रद्धालु कश्मीर घाटी पहुंचते हैं। आमतौर पर प्रशासन की ओर से विशेष परिवहन व्यवस्था की जाती है, जिसमें जम्मू से बसों के बेड़े को रवाना किया जाता है।

यह मंदिर अपने प्राकृतिक जलस्रोत के लिए प्रसिद्ध है। मान्यता है कि इसका पानी चमत्कारिक रूप से रंग बदलता है। गहरे रंग को कठिन समय का संकेत माना जाता है, जबकि हल्के रंग शांति और समृद्धि के प्रतीक माने जाते हैं।

धार्मिक महत्व के अलावा यह मेला कश्मीर की साझा सांस्कृतिक विरासत का भी प्रतीक है। स्थानीय कश्मीरी मुस्लिम परंपरागत रूप से मेले की व्यवस्थाओं में सहयोग करते हैं, जलपान और लंगर की व्यवस्था करते हैं तथा लौटकर आने वाले कश्मीरी पंडितों का स्वागत करते हैं। यह सदियों पुरानी सामाजिक और सांस्कृतिक एकता का उदाहरण माना जाता है।

श्रद्धालु माता को विशेष रूप से दूध, खीर और चीनी की बताशे अर्पित करते हैं।

Source: IANS

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