जैश-ए-मोहम्मद मॉड्यूल केस: गुजरात एटीएस ने तीन आरोपियों से कराई घटनास्थल की पहचान

बनासकांठा, 6 जुलाई । गुजरात एंटी टेररिज्म स्क्वॉड (एटीएस) ने सोमवार को कथित जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) मॉड्यूल मामले में गिरफ्तार आठ आरोपियों में से तीन को पुलिस रिमांड के दौरान जांच के तहत बनासकांठा जिले के पालनपुर स्थित भागल गांव ले जाकर घटनाक्रम का पुनर्निर्माण किया।

सूत्रों के अनुसार, आरोपियों को गांव ले जाने का उद्देश्य घटनाओं के क्रम को दोबारा समझना, जांच में जुटाए गए सबूतों की पुष्टि करना और गिरफ्तार आरोपियों से मिली जानकारी का सत्यापन करना था।

गांव ले जाए गए तीन आरोपियों की पहचान इब्राहिम मोहम्मद हुसैन घाघा, मुदस्सिर अब्दुल्ला गाजीवाला और अहमद अब्दुल्ला गाजीवाला के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक, अहमद और मुदस्सिर सगे भाई हैं, जबकि इब्राहिम उनका मामा है।

यह कार्रवाई कुछ दिन पहले गुजरात और मध्य प्रदेश से आठ आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद की गई है। एटीएस का आरोप है कि ये लोग पाकिस्तान स्थित प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े थे। उन्होंने "दार-उल-इस्लाम गुजरात जैश-ए-मोहम्मद" नाम से स्थानीय मॉड्यूल बनाया था।

सभी आठ आरोपियों के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए), 1967 की धाराएं 13, 17, 18, 38 और 39 तथा भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 की धाराएं 61 और 148 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

बाद में अदालत ने सभी आरोपियों को 14 दिनों की पुलिस रिमांड पर भेज दिया।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में एटीएस के डीआईजी सुनील जोशी ने कहा था, "यह समूह गुजरात में एक नेटवर्क तैयार करने की कोशिश कर रहा था, जो भविष्य में जरूरत पड़ने पर जैश-ए-मोहम्मद को रसद और अन्य सहायता उपलब्ध करा सके। हालांकि, जांच में किसी खास हमले के लक्ष्य का पता नहीं चला है।"

जांच एजेंसियों का दावा है कि आरोपी पाकिस्तान में बैठे अब्दुल्ला और मोहम्मद उमर नामक हैंडलरों के संपर्क में थे। उन्होंने जैश-ए-मोहम्मद के साहित्य का गुजराती भाषा में अनुवाद कर संगठन की विचारधारा फैलाने का प्रयास किया था।

एटीएस के अनुसार, आरोपियों को 'डेड-ड्रॉप' पद्धति के जरिए करीब 3 लाख रुपए मिले थे, जिनमें से कुछ रकम का इस्तेमाल कथित तौर पर एक सेकेंड हैंड वाहन खरीदने में किया गया।

एटीएस ने यह भी आरोप लगाया कि अहमद और इब्राहिम मॉड्यूल में प्रमुख भूमिका निभा रहे थे। जांच में सामने आया है कि उन्होंने एक पाकिस्तानी हैंडलर के निर्देश पर वडोदरा में कश्मीर के एक अज्ञात मध्यस्थ से मुलाकात की थी।

जांचकर्ताओं ने बताया कि छापेमारी के दौरान मोबाइल, हस्तलिखित पत्र, किताबें, डिजिटल फाइलें, अनुवादित साहित्य और अन्य सामग्री बरामद की गई थी। फिलहाल इन सभी सबूतों का विश्लेषण किया जा रहा है।

भागल गांव में कराया गया घटनाक्रम का पुनर्निर्माण एटीएस की उस प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसके तहत आरोपियों की गतिविधियों, कथित साजिश की समय-श्रृंखला और जुटाए गए सबूतों की पुष्टि की जा रही है।

Source: IANS

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