गर्भावस्था के आधार पर टीसीएस की पूर्व कर्मचारी निदा खान को जमानत, कोर्ट ने भगवान कृष्ण के जन्म का दिया संदर्भ

नासिक, 10 जुलाई । नासिक की एक विशेष अदालत ने टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) की पूर्व कर्मचारी निदा खान को गर्भावस्था के आधार पर जमानत दे दी है।

जानकारी के अनुसार यौन उत्पीड़न, कथित धार्मिक दबाव और धर्मांतरण से जुड़े मामलों में आरोपी निदा खान को अदालत ने 75 हजार रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि के एक सक्षम जमानतदार पर रिहा करने का आदेश दिया। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश केजी जोशी ने अपने आदेश में कहा कि किसी भी महिला के लिए जेल में बच्चे को जन्म देने का दर्द और उससे जुड़ा सामाजिक कलंक असहनीय होता है।

उन्होंने इस संदर्भ में भगवान कृष्ण के जेल में जन्म लेने की कथा का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसी स्थिति से बचाने और नवजात शिशु के हितों को ध्यान में रखते हुए न्यायिक विवेक का प्रयोग करना उचित होगा। पांच महीने की गर्भवती निदा खान को 7 मई को छत्रपति संभाजीनगर के एक किराए के फ्लैट से गिरफ्तार किया गया था। वह लगभग 25 दिनों तक फरार रही थी। उसकी ओर से दायर जमानत याचिका में गर्भावस्था को प्रमुख आधार बनाया गया था।

अदालत ने यह भी माना कि मामले की जांच पूरी हो चुकी है और आरोपपत्र दाखिल किया जा चुका है, इसलिए उसे आगे न्यायिक हिरासत में रखने की आवश्यकता नहीं है।

सरकारी पक्ष ने जमानत का विरोध करते हुए दावा किया कि जांच के दौरान यौन उत्पीड़न और धार्मिक दबाव से जुड़े पर्याप्त साक्ष्य सामने आए हैं। वहीं, निदा खान के वकील राहुल कसलीवाल ने अदालत में कहा कि उनकी मुवक्किल निर्दोष है, उसे झूठा फंसाया गया है और वह अप्रैल में बर्खास्त किए जाने से पहले टीसीएस में एसोसिएट के पद पर कार्यरत थी।

पुलिस टीसीएस की नासिक इकाई में महिला कर्मचारियों के कथित शोषण, जबरन धर्मांतरण के प्रयास, धार्मिक भावनाएं आहत करने, छेड़छाड़ और मानसिक उत्पीड़न से जुड़े कुल नौ मामलों की जांच कर रही है। देवलाली कैंप पुलिस स्टेशन में दर्ज इस मामले में मुकदमा दर्ज है। चूंकि शिकायतकर्ता अनुसूचित जाति समुदाय से है, इसलिए आरोपियों पर अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की संबंधित धाराएं भी लगाई गई हैं।

जांच एजेंसियों के अनुसार, निदा खान पर आरोप है कि उसने शिकायतकर्ता को बुर्का और धार्मिक साहित्य उपलब्ध कराया, मोबाइल फोन में इस्लाम से संबंधित एप्लिकेशन इंस्टॉल किए, घर जाकर नमाज पढ़ने का तरीका बताया तथा हिजाब पहनने के लिए प्रेरित किया। हालांकि, इन सभी आरोपों पर अंतिम निर्णय अदालत में सुनवाई और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही होगा।

Source: IANS

अन्य समाचार

Advertisement

Advertisement

Advertisement

Get Newsletter

Advertisement