अनुपम खेर ने बचपन के 'बिट्टू' को याद कर लिखा इमोशनल नोट, कहा- 'शिमला का वो लड़का आज भी जिंदा है'

मुंबई, 11 मार्च। हम अपनी जिंदगी में कितना भी बड़ा मुकाम हासिल कर लें लेकिन अपने बचपन और अपने अंदर के बच्चे की यादें हमेशा हमारे साथ रहती हैं। ऐसा ही अनुभव अभिनेता अनुपम खेर के साथ भी है। उन्होंने बुधवार को अपनी पुरानी यादों को फिर से दोहराया।

अभिनेता ने इंस्टाग्राम पर पुरानी तस्वीर शेयर की। इस पोस्ट में उन्होंने खुद को बिट्टू कहकर संबोधित किया, जो उनका बचपन का नाम है। अभिनेता ने इस तस्वीर के साथ एक इमोशनल नोट भी लिखा, जिसमें उन्होंने अपने शहर शिमला के उस लड़के की बात की, जिसकी आंखों में कई सारे सपने थे।

शिमला के रहने वाले अनुपम का हिंदी सिनेमा में सफर आसान नहीं था। उन्होंने साल 1984 में फिल्म सारांश में 65 साल के रिटायर्ड स्कूल शिक्षक का किरदार निभाया था, जो उनकी उम्र से कहीं ज्यादा था। उस वक्त वे युवा थे, लेकिन उन्होंने इस रोल से सबका दिल जीत लिया था।

अभिनेता ने अपने बचपन की फोटो देखकर खुद के अंदर के महत्वाकांक्षी बच्चे को याद करते हुए लिखा, "मेरे प्यारे 16 साल के बिट्टू, इस तस्वीर में तुम्हें देखकर मुझे शिमला का वो छोटा लड़का याद आता है, जिसकी आंखों में बड़े सपने थे और दिल में थोड़ी सी बेचैनी। तुम्हें नहीं पता था कि जिंदगी शिमला की शांत पहाड़ियों से निकलकर दुनिया के बड़े मंचों, स्टूडियो और फिल्मों तक ले जाएगी। तुम हजारों लोगों से मिलोगे, कई किरदार निभाओगे, तालियां भी मिलेंगी और आलोचना भी सहनी पड़ेगी। सफलता मिलेगी, असफलता भी आएगी। कई बार हिम्मत की परीक्षा होगी।"

उन्होंने लिखा कि वे इतने सालों के बाद अभी भी वही बिट्टू हैं। उन्होंने लिखा, "मैं आज भी वही छोटे से शहर का लड़का हूं, जो मानता था कि 'कुछ भी हो सकता है।' मैंने कभी हालातों को अपने सपनों से बड़ा नहीं होने दिया। मैं खुलकर हंसता था, दिल से महसूस करता था और कभी भी हार नहीं मानी। समय के साथ दुनिया बदली, मेरा नाम दूर-दूर तक पहुंचा, लेकिन सबसे कीमती चीज जो मेरे साथ रही, वो थी बिट्टू की जिज्ञासा, उम्मीद, जिद और सोच।"

अनुपम ने लिखा, "बिट्टू, तुम कई बार गिरोगे, लेकिन हर गिरावट तुम्हें मजबूत बनाएगी। एक दिन तुम खुद को 'असफलताओं से बनी सफलता की कहानी' कहोगे। इसलिए धन्यवाद कि तुमने सपने देखे, विश्वास किया और बिना किसी गारंटी के मेहनत की।"

अभिनेता ने बिट्टू की मासूमियत, हिम्मत और कभी न खत्म होने वाली उम्मीद को धन्यवाद दिया। उन्होंने लिखा, "70 साल की उम्र में भी मैं इस सफर को उसी उत्साह के साथ जी रहा हूं, जैसे जिंदगी अभी बस इंटरवल पर पहुंची हो।" अंत में उन्होंने लिखा, "दुनिया तुम्हें बदलने की कोशिश करेगी, लेकिन तुम्हारी सबसे बड़ी जीत होगी खुद जैसे बने रहना। प्यार और गर्व के साथ, तुम ही... बिट्टू (जिसे अब लोग अनुपम कहते हैं) अब थोड़ा बड़ा हो गया हूं, लेकिन दिल से अब भी वही शिमला का लड़का हूं।"

Source: IANS

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