Teheran
ईरान और मिडिल ईस्ट में एक बार फिर से हालात तनावपूर्ण होते हुए नजर आ रहे हैं। इस बीच ईरान के विदेश मंत्रालय ने जानकारी दी है कि सैयद अब्बास अराघची चीन के दौरे पर जा रहे हैं।
ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे युद्धविराम के बीच होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान की नौसेना लगातार नजर बनाए हुए है। ईरान ने मंगलवार को दावा किया।
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने कहा है कि अमेरिका की तरफ से दिए गए प्रस्ताव की ईरानी अधिकारी समीक्षा कर रहे हैं, ताकि दोनों पक्षों के बीच लड़ाई रोककर सुलह हो सके।।
ईरान ने सोमवार को अमेरिका की सेना को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में प्रवेश करने के खिलाफ कड़ी चेतावनी दी। ईरान ने कहा कि अगर अमेरिकी सेना इस जलडमरूमध्य के करीब आने या इसमें प्रवेश करने की कोशिश करेगी, तो उस पर हमला किया जाएगा।
ईरान और अमेरिका के बीच दो हफ्ते के सीजफायर के बाद सुलह को लेकर अब तक कोई बात नहीं बन पाई है। इस बीच ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि अमेरिका ने युद्ध खत्म करने के लिए ईरान के 14-पॉइंट वाले प्रस्तावित प्लान पर जवाब दिया है।
ईरान ने अमेरिका के नौ-बिंदु प्रस्ताव के जवाब में अपने क्षेत्र के आसपास मौजूद अमेरिकी सैन्य बलों की वापसी और हमले न करने की गारंटी की मांग की है। यह जानकारी रविवार को स्थानीय मीडिया ने दी।
ईरान ने इस्फहान यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी में अमेरिकी-इजरायली हमलों से क्षतिग्रस्त हिस्से को ‘वॉर म्यूजियम’ में तब्दील करने की योजना बनाई है। अधिकारियों का कहना है कि यह कदम हालिया संघर्ष के दौरान वैज्ञानिक संस्थानों पर हुए हमले के दर्द को दर्शाने के लिए उठाया जा रहा है।
ईरान का एक सुपरटैंकर अमेरिकी नाकेबंदी को चकमा देकर एशिया-प्रशांत क्षेत्र तक पहुंच गया है। मॉनिटरिंग फर्म 'टैंकरट्रैकर्सडॉटकॉम' के अनुसार, जहाज लगभग 1.9 मिलियन बैरल कच्चा तेल लेकर वहां से निकल गया।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान को लेकर विवाद और गहरा गया है, जिसमें उन्होंने ईरानी जहाजों की जब्ती कार्रवाई को "पाइरेट्स जैसा" (समुद्री लुटेरों) बताया। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन की "सीधी स्वीकारोक्ति" करार देते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी है।
ईरान का दावा है कि उनकी सेना इस समय होर्मुज स्ट्रेट पर पूरा नियंत्रण रखे हुए है। ईरान की सेना के प्रवक्ता मोहम्मद अकरमीनिया ने कहा कि सेना की अनुमति के बिना कोई भी जहाज इस रास्ते से नहीं गुजर सकता, चाहे वह दोस्त देश का हो या दुश्मन का।
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