असम की धेमाजी सीट पर भाजपा के रानोज पेगु ने लगाई हैट्रिक, कांग्रेस

धेमाजी, 4 मई । असम की धेमाजी (एसटी) सीट पर भारतीय जनता पार्टी के मौजूदा विधायक रानोज पेगु ने लगातार तीसरी बार चुनाव जीतकर हैट्रिक लगा दी है। रानोज पेगु ने कांग्रेस के उम्मीदवार सैलेन सोनोवाल को 32,229 से अधिक वोटों से हरा दिया है। भाजपा प्रत्याशी रानोज पेगु को 83,649 वोट और कांग्रेस प्रत्याशी सैलेन सोनोवाल को 51,420 वोट मिले।

वहीं, अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस के प्रत्याशी नरेंद्र कुमार पाव को 3,550 वोट मिले जबकि निर्दलीय प्रत्याशी बाबुल सोनोवाल को 1,675 वोट मिले।

असम की 126 विधानसभा सीटों पर 9 अप्रैल को मतदान हुआ था और 4 मई को मतगणना हुई, जिसमें धेमाजी (एसटी) सीट पर भाजपा प्रत्याशी रानोज पेगु विजयी हुए।

राजनीतिक इतिहास की बात करें तो इस सीट पर विभिन्न दलों का प्रभाव देखने को मिला है। असम गण परिषद (एजीपी), कांग्रेस, भाजपा व स्वतंत्र उम्मीदवारों और अन्य दलों ने भी समय-समय पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। 2016 में भाजपा ने प्रधान बरुआ के नेतृत्व में इस सीट पर जीत दर्ज की, जिसके बाद 2017 के उपचुनाव में रानोज पेगु ने कांग्रेस के बाबुल सोनोवाल को हराकर अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत की।

1967 में स्थापित धेमाजी विधानसभा सीट अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए आरक्षित है और यह लखीमपुर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र का हिस्सा है। यह क्षेत्र मुख्य रूप से ग्रामीण और आदिवासी बहुल है, जहां विकास और प्राकृतिक आपदाएं चुनावी मुद्दों में हमेशा प्रमुख रही हैं। धेमाजी नगर क्षेत्र, धीमाजी विकास ब्लॉक, बोरडोलोनी और माछखोवा ब्लॉकों के हिस्सों को मिलाकर यह निर्वाचन क्षेत्र बना है।

अगर देखा जाए तो 2021 के विधानसभा चुनाव में पेगु ने अपनी स्थिति को और मजबूत करते हुए 87,681 वोट हासिल किए और असम जातीय परिषद के चित्तरंजन बसुमतारी को 30,792 वोटों से हराया। इस जीत के बाद पेगु राज्य सरकार में कैबिनेट मंत्री भी बन गए। उस चुनाव में बाढ़, तटबंधों की खराब स्थिति, ग्रामीण क्षेत्र में बुनियादी ढांचे की कमी और बेरोजगारी प्रमुख मुद्दे रहे थे। ये मुद्दे 2026 के चुनाव में भी कमोबेश बने हुए हैं।

धेमाजी क्षेत्र की सबसे बड़ी चुनौती यहां की भौगोलिक स्थिति है। ब्रह्मपुत्र नदी और सुबनसिरी नदी के कारण हर साल आने वाली बाढ़ लोगों के जीवन और कृषि को बुरी तरह प्रभावित करती है। इसके अलावा, तटबंधों की मरम्मत, सड़क संपर्क, स्वास्थ्य सेवाएं और शिक्षा व्यवस्था जैसे मुद्दे मतदाताओं के लिए बेहद अहम हैं।

लोकसभा चुनाव के रुझान भी इस सीट की राजनीति को प्रभावित करते रहे हैं। 2009 में असम गण परिषद (एजीपी) ने कांग्रेस को हराया था लेकिन 2014 से भाजपा ने इस क्षेत्र में अपनी मजबूत पकड़ बना ली। 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव में भी भाजपा ने बढ़त बनाए रखी। हालांकि जीत का अंतर कुछ कम हुआ। इसके बावजूद पार्टी का जनाधार स्थिर बना हुआ है।

मतदाता आंकड़ों में भी इस बार बड़ा बदलाव देखने को मिला है। 2026 के चुनाव के लिए कुल 1,78,319 मतदाता पंजीकृत थे, जो 2024 की तुलना में लगभग 7,200 अधिक हैं। हालांकि 2024 में मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान 77,304 नाम हटाए गए थे, जिससे कुल मतदाता संख्या में भारी गिरावट आई थी।

इस प्रक्रिया को लेकर विपक्ष, खासकर कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि यह अभियान पक्षपातपूर्ण था और भाजपा विरोधी मतदाताओं को निशाना बनाया गया। हालांकि धेमाजी में आदिवासी बहुलता और कम अल्पसंख्यक आबादी के कारण इस मुद्दे पर ज्यादा विरोध नहीं हुआ था।

Source: IANS

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