दीपावली पर इस समय करें लक्ष्मी-गणेश-कुबेर की पूजा, ज्योतिषी ने बताया शुभ मुहूर्त
दीपावली सिर्फ दीयों का त्योहार नहीं है बल्कि यह मां लक्ष्मी के आह्वान, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा को घर में लाने का पर्व है।
प्रयागराज, 7 नवंबर । दीपावली सिर्फ दीयों का त्योहार नहीं है बल्कि यह मां लक्ष्मी के आह्वान, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा को घर में लाने का पर्व है। इस बार दीपावली को लेकर लोगों के मन में पूजा के शुभ मुहूर्त, विधि और क्या करें-क्या न करें को लेकर कई सवाल हैं। इन्हीं सवालों का जवाब दिया है प्रयागराज की प्रसिद्ध ज्योतिषी शिप्रा सचदेव ने।
उन्होंने आईएएनएस से बातचीत में बताया कि दीपावली पर मां लक्ष्मी, भगवान गणेश और भगवान कुबेर की पूजा की जाती है और इस दिन उनका विशेष आवाहन किया जाता है। इस पूजा के लिए शुभ मुहूर्त का विशेष महत्व होता है, क्योंकि दीपावली की पूजा हमेशा स्थिर लग्न में की जाती है।
शिप्रा सचदेव ने बताया कि स्थिर लग्न कुल चार होते हैं। पहला वृश्चिक लग्न, दूसरा कुंभ लग्न, तीसरा वृषभ लग्न और चौथा सिंह लग्न। इनमें से हर लग्न का अपना अलग महत्व है और हर लग्न में पूजा का फल भी अलग-अलग माना जाता है। वृश्चिक लग्न सुबह पड़ता है, इसलिए इस समय पूजा-अर्चना नहीं की जाती है। कुंभ लग्न व्यापारिक क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए होता है। जो लोग व्यापार, व्यवसाय या दुकान से जुड़े हुए हैं, वे इस लग्न में पूजा कर सकते हैं। इस बार कुंभ लग्न का शुभ मुहूर्त दोपहर 1 बजकर 26 मिनट से लेकर 2 बजकर 50 मिनट तक रहेगा।
उन्होंने कहा कि तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण है वृषभ लग्न। वृषभ लग्न की पूजा सबसे अच्छी मानी जाती है क्योंकि यह शुक्र का नक्षत्र होता है और शुक्र में ही मां लक्ष्मी का आह्वान किया जाता है। यह लग्न प्रदोष काल में आता है, इसलिए इसमें की गई पूजा-अर्चना सबसे उत्तम मानी जाती है। इस समय आप अपने कार्यक्षेत्र में भी पूजा कर सकते हैं और घर में भी पूजा-अर्चना कर सकते हैं। इस बार वृषभ लग्न का शुभ मुहूर्त शाम 5 बजकर 50 मिनट से प्रारंभ होगा और रात 7 बजकर 40 मिनट तक रहेगा। यही समय दीपावली की मुख्य पूजा के लिए सबसे अच्छा रहेगा।
शिप्रा सचदेव ने कहा कि सिंह लग्न की पूजा महाकाली और मां कालरात्रि की पूजा होती है। इस समय मां लक्ष्मी घर में स्थिर रूप से वास करती हैं। अगर किसी को ऐसा लगता है कि घर में किसी प्रकार की नकारात्मकता है या किसी तरह की तंत्र क्रिया हुई है, तो इस समय पूजा-अर्चना करने से न सिर्फ मां लक्ष्मी का आवाहन होता है, बल्कि नकारात्मकता भी दूर होती है। सिंह लग्न का शुभ मुहूर्त मध्य रात्रि में 12 बजकर 40 मिनट से प्रारंभ होकर 2 बजकर 50 मिनट तक रहेगा।
उन्होंने पूजा के साथ ही एक विशेष उपाय भी बताया। उन्होंने कहा कि आप एक पोटली बना सकते हैं या एक कलश स्थापित कर सकते हैं और बाद में इसे अपने लॉकर में या जहां आप धन रखते हैं, वहां रख सकते हैं। इस पोटली या कलश में गोमती चक्र, कुछ कौड़ी, धनिया, हल्दी की कुछ गांठें, पीली सरसों और थोड़ी सी दक्षिणा रखनी होती है। इसको पोटली बनाकर या कलश में मां को समर्पित किया जाता है और दीपावली के दो दिन बाद इसे बांधकर जब तिजोरी में रखा जाता है, तो मां लक्ष्मी स्थिर रूप से घर में वास करती हैं।
उन्होंने कहा कि इसी तरीके से पूजा-अर्चना करनी चाहिए और मां लक्ष्मी का संपूर्ण दिन आवाहन करना चाहिए। अगर आप कनकधारा स्तोत्र पढ़ सकते हैं तो यह बहुत ही अच्छी बात है। अगर नहीं पढ़ सकते हैं, तो आप इसे यूट्यूब या किसी अन्य माध्यम पर लगा सकते हैं और संपूर्ण दिन इसे चलने दे सकते हैं, तो यह भी बहुत अच्छा रहेगा। लेकिन मध्य रात्रि में अगर आप कनकधारा स्तोत्र पढ़ते हैं, सुनते हैं और घर की बिटिया इसे पढ़ती है, तो यह बहुत ही शुभ माना जाता है। ऐसा करने से माँ लक्ष्मी घर में स्थिर रूप से रहती हैं।
Source: IANS