रामभक्तों पर गोलियां चलवाने वाले अयोध्या आएं, लेकिन पहले माफी मांगें:

अयोध्या, 7 नवंबर । उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को दीपोत्सव के मंच से अयोध्या में रामभक्तों पर गोलियां चलवाने और संतों पर लाठियां बरसाने वालों को निशाने पर लिया। उन्‍होंंने कहा कि ऐसे लोग अयोध्या जरूर आएं, लेकिन पहले रामभक्तों और संतों से माफी मांगें। अपने कृत्यों का पश्चाताप करें। प्रभु श्रीराम सबके प्रति कृपालु हैं, वे क्षमा कर देंगे।

सीएम योगी ने कहा कि कभी जय श्रीराम बोलने पर गोलियां चलती थीं, आज वही अयोध्या त्रेता युग की स्मृतियों को जीवंत कर रही है।

मुख्यमंत्री शनिवार को श्री अयोध्या धाम में आयोजित दीपोत्सव के 10वें संस्करण को संबोधित कर रहे थे। मुख्य अतिथि उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन का स्वागत करते हुए उन्होंने कहा कि तमिलनाडु के सामान्य किसान परिवार से निकलकर उन्होंने भारतीय संस्कृति और मूल्यों के प्रति समर्पण के बल पर अनेक महत्वपूर्ण दायित्व निभाए हैं। समारोह में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल भी उपस्थित रहीं।

सीएम ने कहा कि श्रीराम की चेतना ही भारत की चेतना है। श्रीराम भारत राष्ट्र के प्राण और आत्मसम्मान हैं। गोस्वामी तुलसीदास की चौपाई 'अवधपुरी अति रुचिर बनाई, देवन्ह सुमन बृष्टि झरि लाई' का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि आज की अयोध्या को देखकर त्रेता युग का स्मरण होता है। जिस प्रकार 14 वर्ष के वनवास के बाद प्रभु श्रीराम के लौटने पर अयोध्या सजी होगी, वैसी ही अनुभूति आज रामनगरी करा रही है।

मुख्यमंत्री ने विरोधियों पर कटाक्ष करते हुए कहा कि जिन्होंने कभी अयोध्या की गलियों को रक्तरंजित किया, वे आज भी अपने लोभ का संवरण नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे लोग कथा में पहुंचते हैं तो उन्हें कथा की मर्यादा तक का ज्ञान नहीं होता। कथा और मुशायरे का अंतर भी नहीं समझ पाते। अपनी उच्छृंखल वृत्ति से कथा की पवित्र परंपरा को अपवित्र करने का प्रयास करते हैं।

उन्होंने कहा कि जिन्होंने न्यायालयों में वकीलों की फौज खड़ी कर श्रीराम के अस्तित्व को नकारने का प्रयास किया था, आज वे भी राम के अस्तित्व को स्वीकार कर रहे हैं। यह वैचारिक विजय है। श्रीराम ने वनवासियों, निषादराज और माता शबरी सहित सबको अपनाया। आज श्रीराम जन्मभूमि परिसर में महर्षि वाल्मीकि, महर्षि विश्वामित्र, माता शबरी और गृध्रराज जटायु की उपस्थिति उसी समरसता का संदेश देती है। हालांकि, कोई मारीच बनकर आएगा तो राम के बाणों से बच नहीं पाएगा।

मुख्यमंत्री ने राम जन्मभूमि आंदोलन में कारसेवकों के बलिदान, संतों के संघर्ष और अशोक सिंघल के नेतृत्व में चले आंदोलन का स्मरण किया। उन्‍होंने कहा कि 500 वर्षों की चुनौतियों के बाद रामलला अपने जन्मस्थान पर विराजमान हुए हैं। रामभक्तों ने जो इतिहास रचा है, उसे अब कोई मिटा नहीं सकता। अयोध्या अब कभी कर्फ्यू के दायरे में नहीं आएगी। यहां न कोई दंगा-फसाद करने का दुस्साहस कर पाएगा और न संतों का अपमान होगा।

सीएम ने कहा कि कभी अयोध्या में महज तीन घंटे बिजली मिलती थी। आज यह स्मार्ट सिटी के साथ सोलर सिटी भी बन चुकी है। धर्म पथ, भक्ति पथ, श्रीराम पथ और जन्मभूमि पथ श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लगभग 40 हजार करोड़ रुपये की परियोजनाएं अयोध्या के विकास में लगाई गई हैं या उन पर काम चल रहा है।

उन्होंने कहा कि त्रेता युग में प्रभु श्रीराम पुष्पक विमान से अयोध्या आए थे, लेकिन हजारों वर्षों तक यहां हवाई अड्डा नहीं बन पाया। आज महर्षि वाल्मीकि के नाम पर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा है। राम की पैड़ी में सरयू का जल प्रवाहित हो रहा है। माता शबरी के नाम पर रसोई और निषादराज के नाम पर रैन बसेरे आधुनिक अयोध्या की पहचान बन रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 25 हजार दीपों से शुरू हुआ दीपोत्सव दसवें संस्करण में 25 लाख की सीमा पार कर चुका है। इस बार उपराष्ट्रपति के हाथों दीप प्रज्वलन के साथ अयोध्या में 30 लाख दीप जलाने का लक्ष्य है। यह आयोजन दुनिया भर के करोड़ों रामभक्तों को भावनात्मक रूप से जोड़ रहा है। उन्होंने प्रदेशवासियों को दीपोत्सव और दीपावली की शुभकामनाएं देते हुए रामराज्य की अवधारणा को साकार करने का आह्वान किया।

Source: IANS

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