मध्य-पूर्व तनाव पर मोहसिन तकवी का सवाल, अगर जीत गए हैं ट्रंप तो अब युद्ध क्यों?

नई दिल्ली, 12 अप्रैल | ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के उपाध्यक्ष सैयद मोहसिन तकवी ने मानवीय सहायता और पश्चिम एशिया में जारी संघर्षों को लेकर समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में कहा कि हमदर्दी के जज्बे के तहत ईरान में दवाएं भेजी जा रही हैं।  

सैयद मोहसिन तकवी ने कहा कि हजारों लोग वहां (ईरान) जख्मी हो रहे हैं और अस्पतालों में पहुंच रहे हैं। ईरान में भारतीय छात्रों को लेकर उन्होंने कहा कि ईरान में जितने भी हिंदुस्तानी रह रहे हैं, आम ईरानियों की तरह वही जज्बा उनके अंदर भी है। भारतीय छात्र बहादुरी के साथ ईरान में रह रहे हैं। ईरान सरकार इंसानियत के नाते भारतीय छात्रों की मदद कर रही है।

पश्चिम एशिया में तनाव को लेकर भारत के स्टैंड पर उन्होंने कहा कि भारत के लोगों ने ईरान को लेकर हमदर्दी जताई है। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बातचीत को लेकर उन्होंने कहा कि बातचीत में नतीजा निकलना काफी मुश्किल काम था। आपने देखा होगा कि सीजफायर के बाद जिस तरह से इजरायल ने लेबनान में बमबारी की, वो इस बात का सबूत था कि इजरायल नहीं चाहता कि युद्ध खत्म हो। इजरायल की मंशा है कि अमेरिका जंग लड़ता रहे, क्योंकि इजरायल अकेले जंग नहीं लड़ सकता।

सैयद मोहसिन तकवी ने कहा कि गाजा और लेबनान में निहत्थे लोगों की हत्या कर देना कोई बहादुरी नहीं है। अमेरिका में एक मजबूत लॉबी है, जो इजरायल के लिए काम करती है। यही वजह है कि पुराने मुद्दे बार-बार लाए गए। उन्होंने कहा कि 30-35 साल से इजरायल यही कह रहा है कि ईरान 10-15 दिन में परमाणु बम बना लेगा। अगर ईरान को परमाणु बम बनाना ही होता तो अब तक बना चुका होता। इन्हीं बातों पर 21 घंटे बर्बाद कर दिए गए और बात आगे नहीं बढ़ सकी।

अमरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान पर सैयद मोहसिन तकवी ने कहा कि अगर ये जीत चुके हैं तो युद्ध बंद हो जाना चाहिए। अगर ट्रंप शिकस्त दे चुके हैं और ईरान की हैसियत कुछ नहीं रह गई है तो दोबारा युद्ध शुरू नहीं होना चाहिए। एक तरफ धमकियां दे रहे हैं, दूसरी तरफ शांति वार्ता चल रही है। दोनों एक साथ नहीं चल सकती। ये शांति वार्ता नहीं थी, ये अमेरिका की धमकियां थीं। 40 दिन के युद्ध ने साबित कर दिया था कि ईरान धमकियों में आने वाला नहीं है।

Source: IANS

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