भारतीय राष्ट्रीय ध्वज का इतिहास: 1906 से तिरंगे तक का पूरा सफर

नई दिल्ली, 14 अगस्त । 15 अगस्त 1947 को भारत को आजादी मिलने से ठीक 24 दिन पहले, यानी 22 जुलाई 1947 को संविधान सभा की बैठक में वर्तमान राष्ट्रीय ध्वज को अपनाया गया था। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हमारा प्यारा 'तिरंगा' रातों-रात इस रूप में नहीं आया? आज हम जिस तिरंगे को गर्व से फहराते हैं, उसने वर्तमान स्वरूप हासिल करने से पहले बदलाव के कई दौर देखे हैं।आइए जानते हैं भारत के राष्ट्रीय ध्वज के क्रमिक विकास और इसके इतिहास के बारे में।

1. पहला अनौपचारिक ध्वज (1906) भारत का पहला अनौपचारिक राष्ट्रीय ध्वज 7 अगस्त 1906 को कोलकाता के पारसी बागान स्क्वायर में फहराया गया था। इस ध्वज में लाल, पीले और हरे रंग की तीन क्षैतिज (horizontal) पट्टियां थीं: ऊपरी पट्टी (हरी): इसमें 8 आधे खिले हुए कमल के फूल बने थे। बीच की पट्टी (पीली): इस पर नीले रंग से 'वंदे मातरम्' लिखा था। निचली पट्टी (लाल): इसमें एक तरफ सूर्य और दूसरी तरफ अर्धचंद्र बना था।

2. मैडम कामा और स्टटगार्ट ध्वज (1907) दूसरा ध्वज 1907 में पेरिस में मैडम भीकाजी कामा और उनके साथ निर्वासित किए गए क्रांतिकारियों द्वारा फहराया गया था। इसे बाद में जर्मनी के स्टटगार्ट में आयोजित इंटरनेशनल सोशलिस्ट कॉन्फ्रेंस में भी प्रदर्शित किया गया। यह ध्वज काफी हद तक पहले ध्वज जैसा ही था, लेकिन इसमें सबसे ऊपर की पट्टी पर 8 कमल के फूलों की जगह सप्तर्षि (सात तारे) दर्शाए गए थे।

3. होमरूल आंदोलन का ध्वज (1917) तीसरा ध्वज 1917 में होमरूल आंदोलन के दौरान लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक और डॉ. एनी बेसेंट द्वारा फहराया गया था। इसमें 5 लाल और 4 हरी क्षैतिज पट्टियां थीं। साथ ही इसमें बाएं कोने पर ब्रिटेन का 'यूनियन जैक' भी शामिल था और एक कोने पर अर्धचंद्र व तारा अंकित था।

4. पिंगली वेंकैया का डिजाइन और चरखा (1921) 1921 में विजयवाड़ा में आयोजित ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के सत्र के दौरान आंध्र प्रदेश के पिंगली वेंकैया ने महात्मा गांधी को एक झंडे का डिजाइन सौंपा। इसमें मुख्य रूप से दो रंग थे - लाल (हिंदू समुदाय के लिए) और हरा (मुस्लिम समुदाय के लिए)। गांधी जी के सुझाव पर इसमें अन्य समुदायों और शांति का प्रतीक सफेद रंग और देश की प्रगति का प्रतीक चरखा जोड़ा गया।

5. 1931: 'तिरंगे' को आधिकारिक स्वीकृतिवर्ष 1931 भारत के ध्वज इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हुआ। कांग्रेस कमेटी ने एक प्रस्ताव पारित कर एक नए ध्वज को राष्ट्रीय ध्वज के रूप में आधिकारिक रूप से स्वीकार किया। इस ध्वज में:सबसे ऊपर केसरिया (Saffron) बीच में सफेद (White) नीचे हरा (Green) रंग थाबीच की सफेद पट्टी पर चरखा अंकित था। इस ध्वज में रंगों को किसी धर्म से न जोड़कर साहस, शांति और सत्य के मूल्यों से जोड़ा गया।

6. 1947: वर्तमान राष्ट्रीय ध्वज का जन्म 22 जुलाई 1947 को जब संविधान सभा ने स्वतंत्र भारत के राष्ट्रीय ध्वज के चयन के लिए बैठक की, तो पिंगली वेंकैया द्वारा डिजाइन किए गए तिरंगे को ही थोड़े से बदलाव के साथ अपनाया गया। इसमें सफेद पट्टी पर बने स्पिनिंग व्हील (चरखे) की जगह सम्राट अशोक के सारनाथ स्तम्भ पर बने 'धर्म चक्र' (अशोक चक्र) को शामिल किया गया।तिरंगे के रंगों और अशोक चक्र का अर्थभाग/रंगप्रतीक एवं अर्थकेसरिया (Saffron)देश का साहस, शक्ति और निस्वार्थता।सफेद (White)शांति, सत्य और पवित्रता।हरा (Green)देश की समृद्धि, विश्वास और उर्वरता।अशोक चक्र (24 तीलियां)गतिशीलता और निरंतर प्रगति; 24 तीलियां अहोरात्र (24 घंटे) कर्तव्य पथ पर चलने का संदेश देती हैं।

Source: The News Com Network

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