केरल में महिलाओं और ट्रांसजेंडरों के लिए फ्री बस यात्रा शुरू, कांग्रेस ने कहा- जनता से किया वादा निभाया

नई दिल्ली, 15 जून । कांग्रेस ने सोमवार को केरल सरकार की ‘प्रियदर्शिनी’ मुफ्त बस यात्रा योजना के शुभारंभ का स्वागत करते हुए इसे आम जनता के हित में बड़ा कदम बताया। इस योजना के तहत राज्य की महिलाओं और ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को केरल राज्य सड़क परिवहन निगम (केएसआरटीसी) की साधारण बसों में मुफ्त यात्रा की सुविधा मिलेगी।

कांग्रेस के महासचिव (संगठन) के.सी. वेणुगोपाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) सरकार ने सत्ता संभालने के एक महीने के भीतर ही अपनी पहली ‘इंदिरा गारंटी’ को लागू कर दिया है।

उन्होंने लिखा, "बहुप्रतीक्षित प्रियदर्शिनी फ्री बस योजना अब लागू हो गई है। केरल की महिलाएं अब केएसआरटीसी की बसों में मुफ्त यात्रा कर सकेंगी और हर महीने हजारों रुपये की बचत करेंगी। हम जनकल्याणकारी नीतियों में विश्वास करते हैं और कर्नाटक, तेलंगाना के बाद अब केरल में भी अपने वादों को पूरा कर रहे हैं।"

विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस नेतृत्व वाले यूडीएफ ने पांच ‘इंदिरा गारंटी’ की घोषणा की थी, जिनमें प्रियदर्शिनी योजना प्रमुख थी। सोमवार से यह योजना पूरे राज्य में लागू हो गई है।

योजना के पहले चरण में सभी आयु वर्ग की महिलाओं और ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को राज्य में संचालित केएसआरटीसी की सभी साधारण बस सेवाओं में मुफ्त यात्रा की सुविधा दी जाएगी। अधिकारियों के अनुसार, इस लाभ के लिए आय, सामाजिक स्थिति या किसी अन्य पात्रता मानदंड की कोई बाध्यता नहीं होगी।

सरकार ने योजना का लाभ उठाने की प्रक्रिया भी बेहद सरल रखी है। इसके लिए किसी प्रकार के पूर्व पंजीकरण, आवेदन या दस्तावेज जमा करने की आवश्यकता नहीं होगी। पात्र यात्री बस में यात्रा के दौरान सीधे इस सुविधा का लाभ उठा सकेंगे।

यात्रियों को बस कंडक्टर से इलेक्ट्रॉनिक टिकट मशीन (ईटीएम) के माध्यम से शून्य मूल्य (जीरो-वैल्यू) ‘प्रियदर्शिनी’ टिकट प्राप्त करना होगा। डिजिटल टिकटिंग प्रणाली प्रत्येक यात्रा का रिकॉर्ड रखेगी, जिससे खर्चों का पारदर्शी लेखा-जोखा और केएसआरटीसी को प्रतिपूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी।

सरकार का कहना है कि इस योजना से लाखों महिलाओं और ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को रोजमर्रा की आवाजाही, शिक्षा, रोजगार और अन्य आवश्यक कार्यों के लिए राहत मिलेगी। साथ ही परिवारों पर परिवहन खर्च का बोझ कम होगा, लोगों की आवाजाही आसान बनेगी और सामाजिक समावेशन को भी बढ़ावा मिलेगा।

Source: IANS

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