लगातार दूसरे दिन हरे निशान में बंद हुआ बाजार, सेंसेक्स 274 अंक उछला, निफ्टी 24,300 के पार

मुंबई, 30 जुलाई । वैश्विक बाजार के मिले-जुले संकेतों के बीच गुरुवार के सत्र में भारतीय शेयर बाजार बढ़त के साथ हरे निशान में बंद हुआ। यह लगातार दूसरा कारोबारी सत्र है जब प्रमुख बेंचमार्कों सेंसेक्स और निफ्टी में तेजी देखने को मिली है।

बाजार बंद होने पर सेंसेक्स 273.55 अंक यानी 0.35 प्रतिशत बढ़कर 77,928.15 पर बंद हुआ, तो वहीं निफ्टी 66.95 अंक यानी 0.28 प्रतिशत बढ़कर 24,317.15 पर बंद हुआ।

प्रमुख सूचकांकों की तुलना में व्यापक सूचकांकों का प्रदर्शन कमजोर रहा, निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में 0.35 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 0.56 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

वहीं सेक्टरवार देखें तो, निफ्टी ऑटो शीर्ष लाभ कमाने वाला इंडेक्स बनकर उभरा, जिसमें 1.63 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इसके साथ ही, निफ्टी ऑयल एंड गैस, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, निफ्टी मीडिया और निफ्टी आईटी भी बढ़त के साथ बंद हुए।

जबकि इसके विपरीत, निफ्टी रियल्टी सूचकांक सबसे अधिक गिरावट दर्ज करने वाला रहा, जिसमें 2 प्रतिशत की गिरावट आई। इसके अलावा, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज, निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी प्राइवेट बैंक और निफ्टी फार्मा इंडेक्स में भी गिरावट देखने को मिली।

निफ्टी 50 इंडेक्स में सबसे ज्यादा लाभ कमाने वाले शेयरों में एम एंड एम, कोल इंडिया, आइशर मोटर्स, मारुति सुजुकी, टीएमपीवी और विप्रो शामिल थे, जबकि नुकसान उठाने वाले शेयरों में एचडीएफसी लाइफ, श्रीराम फाइनेंस, एसबीआई लाइफ, जियो फाइनेंशियल सर्विसेज और इंडिगो शामिल थे।

एक मार्केट एक्सपर्ट ने कहा कि फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को यथावत रखने का फैसला बाजार की उम्मीदों के अनुरूप रहा, लेकिन महंगाई पर लगातार सख्त रुख बनाए रखने के कारण उसका रुख (हॉकिश स्टैंड) बरकरार रहा। अमेरिका में बॉन्ड यील्ड में तेज बढ़ोतरी इस बात का संकेत है कि निकट भविष्य में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना को लेकर दबाव बढ़ रहा है, जिससे वैश्विक निवेशकों की चिंता बनी हुई है। वहीं, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में फिर से उतार-चढ़ाव ने वैश्विक अनिश्चितता को और बढ़ा दिया।

एक्सपर्ट ने आगे कहा कि इन वैश्विक चुनौतियों के बीच घरेलू शेयर बाजार सीमित दायरे में कारोबार करता रहा और दिन भर तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला। निवेशक एक ओर वैश्विक जोखिमों का आकलन करते रहे, वहीं दूसरी ओर भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत बुनियादी स्थिति ने बाजार को सहारा दिया।

इसके अलावा, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की लगातार बढ़ती खरीदारी, रुपए में मजबूती और वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के उत्साहजनक नतीजों ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया। यही वजह रही कि बाजार में गिरावट आने पर निवेशकों ने उसे चुनिंदा शेयरों में खरीदारी का अवसर माना।

Source: IANS

अन्य समाचार

Advertisement

Advertisement

Advertisement

Get Newsletter

Advertisement