बांग्लादेश छात्र आंदोलन हिंसा पर कार्रवाई: ट्रिब्यूनल ने 68 लोगों को सुनाई सजा, 22 को मौत
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जुलाई-अगस्त 2024 में छात्रों के नेतृत्व में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान कथित हत्या, उकसावे, भड़काने और साजिश से जुड़े सात मामलों में बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (आईसीटी) ने अब तक 68 लोगों को सजा सुनाई है, जिनमें से 22 को मौत की सजा दी गई है।

नई दिल्ली, 15 सितंबर । मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जुलाई-अगस्त 2024 में छात्रों के नेतृत्व में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान कथित हत्या, उकसावे, भड़काने और साजिश से जुड़े सात मामलों में बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (आईसीटी) ने अब तक 68 लोगों को सजा सुनाई है, जिनमें से 22 को मौत की सजा दी गई है। मंगलवार को आए एक ताजा फैसले में अवामी लीग के महासचिव ओबैदुल कादर और छह अन्य लोगों को मौत की सजा सुनाई गई।
बांग्लादेश बिजनेस स्टैंडर्ड के अनुसार, मौत की सजा पाने वालों में से 18 लोग फरार हैं, जबकि चार हिरासत में हैं।
मौत की सजा पाने वाले दोषियों में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना, पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमान खान कमाल, अवामी लीग के वरिष्ठ नेता और कई पुलिस अधिकारी शामिल हैं।
मौत की सजा पाने वालों में से 11 अवामी लीग या उससे जुड़े संगठनों के नेता हैं, जैसे शेख हसीना, ओबैदुल कादर और अन्य, जबकि बाकी 11 पुलिस अधिकारी हैं।
अवामी लीग की अध्यक्ष हसीना और पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमान खान कमाल, दोनों को पिछले साल 17 नवंबर को मौत की सजा सुनाई गई थी। पूर्व आईजीपी चौधरी अब्दुल्ला अल-मामून, जो सरकारी गवाह बन गए थे, को पांच साल की जेल हुई। हसीना और कमाल पर उनकी गैर-मौजूदगी में मुकदमा चलाया गया था, ठीक वैसे ही जैसे मंगलवार को सजा पाने वाले छह लोगों पर चलाया गया।
रिपोर्ट के अनुसार, मौत की सजा पाने वाले तीन पूर्व वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों में ढाका मेट्रोपॉलिटन पुलिस (डीएमपी) के पूर्व कमिश्नर, उसके पूर्व संयुक्त कमिश्नर सुदीप कुमार चक्रवर्ती और तत्कालीन अतिरिक्त डिप्टी पुलिस कमिश्नर शाह आलम मोहम्मद अख्तरुल इस्लाम शामिल हैं। साथ ही, पांच अन्य पुलिस अधिकारियों को तीन से छह साल तक की जेल की सजा सुनाई गई।
2024 के छात्र आंदोलन ने हसीना के दशकों लंबे दबदबे को खत्म कर दिया और उनकी सरकार के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों के साथ एक उथल-पुथल भरे दौर की शुरुआत की। इन प्रदर्शनों में भ्रष्टाचार, शिक्षा के क्षेत्र में विफलता और तानाशाही शासन जैसे मुद्दों को उठाया गया। ये प्रदर्शन तेजी से पूरे देश में फैल गए और हजारों लोग सड़कों पर उतर आए। सुरक्षा बलों ने अर्धसैनिक बलों और असली गोलियों का इस्तेमाल करके बेरहमी से कार्रवाई की।
यह एक ऐतिहासिक मोड़ भी साबित हुआ, जिसने तत्कालीन प्रधानमंत्री को देश छोड़ने पर मजबूर कर दिया और अंततः आईसीटी द्वारा उन्हें मौत की सजा सुनाई गई।
पुरानी रिपोर्टों के अनुसार, भ्रष्टाचार और तानाशाही के खिलाफ छात्रों के गुस्से से शुरू हुए इस विद्रोह में अनुमानित रूप से 1,400 से ज्यादा लोग मारे गए और देश का राजनीतिक परिदृश्य बदल गया। इसके बाद अवामी लीग पर प्रतिबंध लगा दिया गया, जबकि हसीना बदले की कार्रवाई के डर से देश छोड़कर भाग गईं।
इस साल फरवरी में बांग्लादेश में आम चुनाव हुए, जिसमें तारिक रहमान के नेतृत्व वाली बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) सत्ता में आई। बांग्लादेश का आईसीटी (इंटरनेशनल क्राइम ट्रिब्यूनल) एक घरेलू युद्ध अपराध न्यायाधिकरण है। इसे 2009 में बनाया गया था ताकि 1971 में बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के दौरान पाकिस्तानी सेना और उनके स्थानीय सहयोगियों द्वारा किए गए नरसंहार के संदिग्धों की जांच और उन पर मुकदमा चलाया जा सके।
इसे दिसंबर 2008 के आम चुनावों में अवामी लीग की दो-तिहाई से ज्यादा बहुमत वाली निर्णायक जीत के बाद स्थापित किया गया था। न्यायाधिकरण ने 2010 में पहली बार आरोप तय किए, लेकिन युद्ध अपराधों के मुख्य दोषी, पाकिस्तानी सैनिक, अदालतों की पहुंच से बाहर ही रहे।
2012 तक, देश की सबसे बड़ी इस्लामी पार्टी जमात-ए-इस्लामी के नौ नेताओं और बीएनपी के दो नेताओं पर युद्ध अपराधों के संदिग्ध के तौर पर आरोप लगाए जा चुके थे। दोषी ठहराए गए पहले व्यक्ति अबुल कलाम आजाद बताए जाते हैं; उन पर उनकी गैर-मौजूदगी में मुकदमा चलाया गया क्योंकि वे देश छोड़ चुके थे। उन्हें जनवरी 2013 में मौत की सजा सुनाई गई थी।
2024 में छात्रों के नेतृत्व में हुए विद्रोह के बाद न्यायाधिकरण की भूमिका और अधिकार-क्षेत्र की फिर से समीक्षा की गई। इस विद्रोह में राज्य की हिंसा और बड़े पैमाने पर अत्याचार के नए तौर-तरीकों का आरोप लगाया गया था।
नवंबर 2024 में आईसीटी एक्ट में अहम संशोधन किए गए। न्यायाधिकरण के अधिकार-क्षेत्र को आधुनिक बनाने और उसका दायरा बढ़ाने के लिए इन संशोधनों को पिछली तारीख से लागू किया गया।
Source: IANS

