झारखंड में सिविल सेवा के अभ्यर्थियों को अधिकतम उम्र सीमा में छूट का मुद्दा विधानसभा में गूंजा

रांची, 19 फरवरी। झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) सिविल सेवा परीक्षा में आवेदकों के लिए अधिकतम आयु सीमा को लेकर उठे विवाद के बीच राज्य सरकार ने राहत के संकेत दिए हैं। 

संसदीय कार्य मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने गुरुवार को विधानसभा में कहा कि आयु सीमा में छूट के मुद्दे पर मंत्रिपरिषद की पिछली बैठक में गंभीर चर्चा हुई है और मुख्यमंत्री भी इस विषय को लेकर संवेदनशील हैं।

सरकार सभी अभ्यर्थियों को आवेदन का अवसर देने पर सकारात्मक विचार कर रही है। विधानसभा के विधायक जयराम महतो और अन्य सदस्यों ने मामला उठाते हुए कहा कि पिछली सिविल सेवा परीक्षा में अधिकतम आयु की गणना एक अगस्त 2017 से की गई थी, जबकि इस वर्ष सिविल सेवा परीक्षा के लिए कट-ऑफ तिथि एक अगस्त 2026 निर्धारित की गई है।

उनका कहना था कि पिछले कई वर्षों में नियमित परीक्षा नहीं होने के कारण बड़ी संख्या में अभ्यर्थी आयु सीमा पार कर चुके हैं और परीक्षा से वंचित हो रहे हैं। कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने भी इस मुद्दे पर सरकार का ध्यान आकर्षित किया।

उन्होंने कहा कि हजारों योग्य अभ्यर्थी प्रभावित हो रहे हैं। कुछ उम्मीदवार उच्च न्यायालय गए, जिन्हें आवेदन की अनुमति मिल गई, लेकिन आर्थिक रूप से कमजोर छात्र अदालत नहीं जा सके और उनके आवेदन लंबित हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि विज्ञापन में कट-ऑफ वर्ष को लेकर असंगति है, जिससे अभ्यर्थियों में भ्रम की स्थिति बनी है। इस पर जवाब देते हुए संसदीय कार्य मंत्री ने कहा कि जो अभ्यर्थी उच्च न्यायालय नहीं गए हैं, उन्हें भी इस प्रक्रिया में शामिल करने पर विचार किया जा रहा है। सरकार इस विषय पर गंभीर और सकारात्मक दृष्टिकोण अपना रही है, ताकि किसी योग्य उम्मीदवार के साथ अन्याय न हो।

Source: IANS

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