विकसित भारत का लक्ष्य आर्थिक प्रगति के साथ आध्यात्मिक जागरण भी हो:

वडोदरा, 23 सितंबर । राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने बुधवार को कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उसमें आध्यात्मिक जागरण भी शामिल होना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश को ऐसे युवा तैयार करने होंगे, जो ज्ञान, तकनीक और कौशल के साथ आत्मविश्वास, आत्मअनुशासन और नैतिक मूल्यों से भी संपन्न हों।

वडोदरा में ब्रह्माकुमारी संस्था के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि भारत की बड़ी युवा आबादी राष्ट्र निर्माण में केंद्रीय भूमिका निभा सकती है, यदि वह अपनी ऊर्जा और प्रतिभा को सकारात्मक दिशा में लगाए।

उन्होंने कहा, "आज युवा जाग चुका है। 2047 तक विकसित भारत का सपना केवल आर्थिक विकास का नहीं, बल्कि आध्यात्मिक जागरण का भी है। आज पूरी दुनिया भारत की ओर देख रही है।"

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत की लगभग 1.4 अरब आबादी में करीब 65 प्रतिशत युवा हैं। ऐसे में देश की जनसांख्यिकीय शक्ति को देखते हुए युवाओं के समग्र विकास पर विशेष ध्यान देना जरूरी है।

राष्ट्रपति नडियाद में ब्रह्माकुमारी संस्था की राष्ट्रीय पहल 'अवेकनिंग इनर स्ट्रेंथ फॉर नेशन बिल्डिंग' के वर्चुअल शुभारंभ के बाद संबोधित कर रही थीं।

उन्होंने कहा कि युवाओं को ज्ञान, तकनीक और कौशल की आवश्यकता है, लेकिन इसके साथ आत्मविश्वास, आत्मअनुशासन, सकारात्मक सोच, संवेदनशीलता और नैतिक मूल्यों का होना भी उतना ही जरूरी है।

राष्ट्रपति ने कहा, "हमें ऐसे युवा तैयार करने हैं जो ज्ञान, तकनीक और कौशल से लैस होने के साथ-साथ आत्मविश्वास, आत्मअनुशासन, सकारात्मक सोच, संवेदनशीलता और नैतिक मूल्यों से भी परिपूर्ण हों।"

उन्होंने कहा कि आज के युवा तेजी से बदलती दुनिया का सामना कर रहे हैं, जहां डिजिटल दुनिया, सूचनाओं की अधिकता, कड़ी प्रतिस्पर्धा, बदलती जीवनशैली और सामाजिक अपेक्षाएं उनके जीवन को प्रभावित कर रही हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि युवाओं के सामने असीम अवसर हैं, लेकिन चुनौतियां भी कम नहीं हैं। इन चुनौतियों का सामना करने के लिए उनमें आंतरिक शक्ति विकसित करना आवश्यक है, जिसमें आत्मजागरूकता, एकाग्रता, भावनात्मक संतुलन, सकारात्मक दृष्टिकोण और आत्मअनुशासन शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि जब युवा अपने विचारों, भावनाओं और कार्यों को सकारात्मक दिशा देते हैं, तो इसका प्रभाव उनके परिवार, कार्यस्थल, समाज और अंततः पूरे राष्ट्र पर पड़ता है।

राष्ट्रपति मुर्मू ने सरदार वल्लभभाई पटेल की राष्ट्र निर्माण की विरासत का भी उल्लेख करते हुए कहा कि उनका जीवन विशेष रूप से युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है।

उन्होंने कहा कि भारत की आध्यात्मिक विरासत को आधुनिक विज्ञान, तकनीक और नए विचारों के साथ जोड़कर विकास का व्यापक मॉडल तैयार किया जा सकता है। योग, ध्यान, अहिंसा, करुणा और 'वसुधैव कुटुंबकम्' जैसी जीवन दर्शन की धरोहर आज भी दुनिया के लिए प्रेरणा है।

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत का लक्ष्य ऐसा राष्ट्र बनाना होना चाहिए जो आर्थिक रूप से समृद्ध, वैज्ञानिक रूप से शक्तिशाली, सामाजिक रूप से समावेशी और आध्यात्मिक रूप से जागृत हो।

इस कार्यक्रम के दौरान ब्रह्माकुमारी संस्था की आध्यात्मिक यात्रा के 90 वर्ष पूरे होने के अवसर पर संगठन की वर्ष 2026 की राष्ट्रीय थीम 'विश्व नवसृजन के लिए आध्यात्मिक जागरण' का भी शुभारंभ किया गया।

Source: IANS

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