लालू यादव की आलोचना से तिलमिलाई रोहिणी आचार्या, कहा- सीएम सम्राट चौधरी के साथ याददाश्त की दिक्कत

पटना, 24 अप्रैल । बिहार विधानसभा के विशेष सत्र में शुक्रवार को प्रदेश की नई सरकार ने विश्वासमत हासिल कर लिया। इस दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राजद अध्यक्ष लालू यादव पर जमकर सियासी हमला बोला। इससे तिलमिलाई रोहिणी आचार्या ने मुख्यमंत्री पर निशाना साधा है।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की याददाश्त के साथ कोई केमिकल लोचा है। पिछले लोकसभा चुनाव में सारण क्षेत्र से चुनाव लड़ चुकी रोहिणी आचार्या ने सोशल मीडिया के जरिए कहा कि मुख्यमंत्री फिर से विरोधाभासी बातें करते ही सदन में दिखे। उन्होंने एक लंबे पोस्ट के जरिए कहा कि सदन में विश्वास मत के प्रस्ताव के दौरान बोलते हुए बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार की 14 करोड़ जनता का आशीर्वाद प्राप्त है।

उन्होंने पूछा कि क्या बिहार में 14 करोड़ मतदाता हैं? क्या एनडीए ने चुनाव सम्राट चौधरी के नाम और चेहरे पर लड़ा था? उन्होंने आगे लिखा, "अपने संबोधन में मुख्यमंत्री अपनी उम्र, अपनी डिग्री के बारे में तो बात करते दिखे, लेकिन अपनी उम्र, अपनी डिग्री को सही साबित करने, सत्यापित करने के पक्ष में कोई तार्किक, तथ्यपरक बात कहने से बचते दिखे।"

रोहिणी आचार्या ने कहा कि लालू यादव के द्वारा जेल भेजे जाने की बचकानी बात कहते हुए प्रपंच के सहारे मुख्यमंत्री की कुर्सी हासिल करने वाले सम्राट चौधरी ये भूल गए कि भाजपा के ही लोग कहते हैं कि कानूनी और न्यायिक प्रक्रिया विधि-विधान के अनुरूप चलती है, किसी के इशारे पर नहीं।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री अपने संबोधन में ये दंभ भरते तो दिखे कि उन्हें मुख्यमंत्री बनाने में नीतीश कुमार ने भूमिका निभायी, मगर ये बताना भूल गए कि उन्होंने ही नीतीश कुमार को हटाने के लिए मुरेठा (पगड़ी) बांध कर प्रतिज्ञा ली थी, मगर बिना प्रतिज्ञा पूरी किए मुरेठा खोल भी लिया था। मुख्यमंत्री अपने संबोधन में खुद पर हो रहे पर्सनल अटैक पर तिलमिलाते दिखे, मगर ये भूल गए कि कैसे उन्होंने एक बेटी के द्वारा अपने पिता को किडनी दिए जाने पर बेहद ही ओछी टिप्पणी की थी।

सीएम सम्राट चौधरी के "सत्ता किसी की बपौती नहीं होती" कहने को लेकर रोहिणी आचार्या ने आगे लिखा है कि मुख्यमंत्री कोई नई बात नहीं कर रहे, ये जगजाहिर है, जनता जिसे चुनकर भेजती है, वही सत्ता में काबिज होता है, मगर वर्तमान मुख्यमंत्री को तो जनता ने चुना ही नहीं। मुख्यमंत्री ये भूल गए कि वे मुख्यमंत्री का चेहरा तो थे ही नहीं। चेहरा तो कोई और था, जिसे साजिश के साथ बेबस-लाचार कर हटा दिया गया।

Source: IANS

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