एआई समिट में प्रदर्शन करने वाले यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं की बढ़ी कस्टडी, 1 मार्च को अगली सुनवाई

नई दिल्ली, 25 फरवरी। राष्ट्रीय राजधानी में एआई समिट के दौरान यूथ कांग्रेस के प्रदर्शन मामले में पटियाला हाउस कोर्ट ने पांचों आरोपियों की पुलिस कस्टडी बढ़ा दी है। इनमें से चार आरोपियों को दिल्ली और एक को ग्वालियर से गिरफ्तार किया गया था।  

पटियाला हाउस कोर्ट ने सभी पांचों आरोपियों की चार दिनों की पुलिस कस्टडी बढ़ाई है। आरोपियों को 1 मार्च को फिर से कोर्ट में पेश किया जाएगा। पांच आरोपियों कृष्णा हरि, कुंदन यादव, अजय कुमार, नरसिम्हा यादव और जितेंद्र यादव की पुलिस कस्टडी पटियाला हाउस कोर्ट ने बढ़ाई है।

दिल्ली पुलिस ने कोर्ट के सामने आरोपियों की कस्टडी बढ़ाने की मांग की थी। दिल्ली पुलिस का कहना था कि पहले 5 दिन की कस्टडी दी गई थी। उदय भानु चिब को गिरफ्तार कर लिया गया है और एक व्यक्ति को ट्रांजिट रिमांड दिया गया है, जिसने साजिश रची है। इन लोगों का उदय भानु और अन्य से सामना कराया जाना है।

पुलिस के अनुसार, सिद्धार्थ नाम के एक व्यक्ति ने टीशर्ट प्रिंट और डिजाइन की थी। उसे हिमाचल में पकड़ा गया है और उसे यहां लाने की कार्रवाई चल रही है। फिर उसका दोबारा आमना-सामना कराया जाना है। इसके लिए हमें ज्यादा दिनों की कस्टडी चाहिए।

दिल्ली पुलिस ने कहा कि रमेश अग्रवाल नाम के एक व्यक्ति ने अग्रिम जमानत याचिका लगाई थी, जिस पर सेशन जज ने सुनवाई की। वहां उसने कहा कि उसने एक लाख टीशर्ट प्रिंट की थीं और इन्हें इंडियन यूथ कांग्रेस के नाम पर खरीदा गया था।

वहीं, बचाव पक्ष ने दिल्ली पुलिस द्वारा पांच दिनों की कस्टडी बढ़ाए जाने की मांग का विरोध किया था।

बता दें कि राष्ट्रीय राजधानी के भारत मंडपम में आयोजित 'इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट- 2026' के दौरान कांग्रेस के 'शर्टलेस प्रोटेस्ट' की जमकर आलोचना हो रही है। कांग्रेस के नेताओं ने भी इसकी निंदा की है। भाजपा और एनडीए के सहयोगी दल कांग्रेस पर तीखा हमला बोल रहे हैं तो वहीं कांग्रेस के नेता प्रदर्शनकारियों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं।

कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि दिल्ली में एआई समिट में हुए विरोध प्रदर्शनों के सिलसिले में युवा कांग्रेस से जुड़े हमारे युवाओं को गिरफ्तार कर पुलिस और न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। मैं इसकी कड़ी निंदा करता हूं। ये विरोध प्रदर्शन सोच-समझकर और राष्ट्रहित में किए गए थे, इसलिए इन्हें गंभीर अपराध नहीं माना जाना चाहिए।

Source: IANS

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