बरसाना में लट्ठमार होली का अद्भुत नजारा, हुरियारों-हुरियारिनों ने लिया राधा-कृष्ण स्वरूप

मथुरा, 26 फरवरी। होली का त्योहार नजदीक है, लेकिन ब्रज में यह पर्व एक दिन का नहीं, बल्कि आस्था और परंपराओं से भरा एक भव्य उत्सव है, जो बसंत पंचमी से शुरू होकर लगभग 40 दिनों तक विभिन्न पारंपरिक तरीकों से मनाया जाता है। 

ब्रज की उन्हीं पारंपरिक होली में से एक लट्ठमार होली को मथुरा के बरसाना में गुरुवार को बहुत ही धूमधाम के साथ मनाया गया। इस खास मौके पर बरसाना की हुरियारिनों ने राधा रानी की सखियों का स्वरूप धारण कर फगुआ (उपहार) लेने के लिए नंदगांव में प्रवेश किया। वहीं, नंदगांव के हुरियारे ने बरसाना से आईं हुरियारिनों के साथ लट्ठमार होली खेली।

परंपरा के अनुसार, जैसे ही बरसाना की हुरियारिनों ने नंदगांव में प्रवेश किया, पूरा क्षेत्र राधा-कृष्ण की रंगीली लीलाओं के रंग में सराबोर हो उठता है। चारों ओर भक्ति और प्रेम का रस फैल जाता है।

नंदगांव के हुरियारे कृष्ण स्वरूप में उनका स्वागत करते हैं और इसके बाद नंदगांव के ऐतिहासिक नंद चौक व रंगीली चौक पर जमकर होली खेली जाती है। ढोल, नगाड़ों और रसिया गायन के बीच गुलाल उड़ता है, लट्ठमार की प्रतीकात्मक छेड़छाड़ होती है और पूरा वातावरण 'राधे-राधे' व 'श्याम' के जयकारों से गूंज उठता है।

यह अनोखी परंपरा ब्रज की सांस्कृतिक विरासत का जीवंत उदाहरण है, जहां प्रेम, हास्य और भक्ति का संगम देखने को मिलता है।

वहीं, नंदगांव के हुरियारे और बरसाना की हुरियारिनों ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए कहा, "नंदगांव के हुरियारे बरसाना की हुरियारिनों के साथ लठ्ठमार होली खेलने के लिए आए। यह अनुभव बहुत ही सुंदर है। ऐसा लगता है कि देवी-देवता होली खेलने के लिए यहां बरसाना में आए हुए हैं। लग रहा है यहीं ठाकुर जी और श्री जी सब एक साथ मिलकर होली खेल रहे हैं।"

विश्व प्रसिद्ध लट्ठमार होली के उत्सव में शामिल होने के लिए अधिकांश हुरियारे और हुरियारिनों द्वारा पारंपरिक पोशाक धारण किया जाता है। महिलाएं और लड़कियां राधा रानी की तरह रंगीन घाघरा-चोली और ओढ़नी से सिर ढके नजर आईं, जहां उन्होंने हाथों में लठ पकड़े हुए थे। वहीं, हुरियारे सिर पर मुरेठा और हाथ में ढाल के साथ कुर्ता में नजर आए।

Source: IANS

अन्य समाचार

Advertisement

Advertisement

Advertisement

Get Newsletter

Advertisement