परिसीमन पर खड़गे ने पीएम मोदी को लिखा पत्र, सर्वदलीय बैठक बुलाने की

नई दिल्ली, 27 अगस्त । कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने परिसीमन के मुद्दे को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। खड़गे ने जानकारी देते हुए बताया कि उन्होंने पीएम मोदी को परिसीमन, संसद के मानसून सत्र के सत्रावसान में देरी और केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री द्वारा एक टीवी इंटरव्यू में बताए गए संभावित विशेष सत्र के बारे में पत्र लिखा है।

खड़गे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पत्र की प्रति साझा की। उन्होंने पत्र में लिखा, "प्रधानमंत्री जी, मैंने पिछली बार आपको 16 जुलाई को पत्र लिखकर अनुरोध किया था कि परिसीमन के लिए सरकार के प्रस्तावों पर चर्चा करने को सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए। मैंने यह भी अनुरोध किया था कि संसद के किसी विशेष सत्र में इन प्रस्तावों को पेश करने से पहले, सभी राजनीतिक दलों को इनका विस्तार से अध्ययन करने के लिए पर्याप्त समय दिया जाए।"

खड़गे ने लिखा, "मैं अब इस अनुरोध को दोहराने के लिए लिख रहा हूं क्योंकि केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री ने कल रात एक टेलीविजन साक्षात्कार में सार्वजनिक रूप से कहा है कि संसद का ऐसा विशेष सत्र बुलाया जा सकता है। शायद इसी कारण से मानसून सत्र के सत्रावसान में लगातार देरी हो रही है।"

कांग्रेस अध्यक्ष ने पत्र में पार्टी का रुख स्पष्ट करते हुए तीन मांगें रखीं। उन्होंने लिखा, "इंडियन नेशनल कांग्रेस का रुख बिल्कुल स्पष्ट है। पहला, अगले 25 वर्षों तक लोकसभा की मौजूदा सदस्य संख्या 543 बनाए रखी जाए। दूसरा, अगले 25 वर्षों तक लोकसभा में राज्यों के अनुसार मौजूदा प्रतिनिधित्व यानी सीटों की संख्या को बनाए रखा जाए। तीसरा, 2029 के लोकसभा चुनावों से महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण लागू किया जाए।"

खड़गे ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री के बताए अनुसार आगे बढ़ने से पहले वह दो बातों पर ध्यान दें। पहला, परिसीमन के जो भी प्रस्ताव सरकार के मन में हैं, उन पर चर्चा करने के लिए सभी दलों की एक बैठक बुलाएं। दूसरा, सभी राजनीतिक दलों और राज्य सरकारों को ऐसे प्रस्तावों का अध्ययन करने के लिए पर्याप्त समय दें।

पत्र के अंत में खड़गे ने लिखा कि यह देश के लिए बहुत महत्वपूर्ण मुद्दा है। कृपया 16 और 17 अप्रैल को की गई कोशिश की तरह इसे फिर से जबरदस्ती थोपने की कोशिश न करें।

बता दें कि परिसीमन का मुद्दा दक्षिणी राज्यों में काफी संवेदनशील माना जा रहा है। विपक्ष का आरोप है कि जनसंख्या के आधार पर परिसीमन होने से दक्षिणी राज्यों का प्रतिनिधित्व घट जाएगा, जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर काम किया है। कांग्रेस लगातार सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग कर रही है।

Source: IANS

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