राज्यसभा में 'भारत छोड़ो आंदोलन' का स्मरण, स्वतंत्रता सेनानियों को दी

नई दिल्ली, 7 अगस्त । राज्यसभा में शुक्रवार ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ की 84वीं वर्षगांठ पर देश के स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि दी गई। ब्रिटिश शासन के खिलाफ शुरू यह आंदोलन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का एक प्रमुख अंग रहा है।

राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने सदन में कहा कि अगस्त 1942 को महात्मा गांधी के नेतृत्व में शुरू हुआ 'भारत छोड़ो आंदोलन' स्वतंत्रता संग्राम का एक ऐतिहासिक और निर्णायक पड़ाव था, जिसने देश की आजादी की लड़ाई को नई दिशा और निर्णायक गति प्रदान की।

सभापति ने अपने संबोधन में कहा कि महात्मा गांधी के 'करो या मरो' के आह्वान ने देशभर के लाखों भारतीयों को जाति, धर्म, भाषा और क्षेत्र की सभी सीमाओं से ऊपर उठकर स्वतंत्रता के साझा उद्देश्य के लिए एकजुट होने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि इस आंदोलन ने भारत की स्वतंत्रता की लड़ाई को जन-जन का आंदोलन बना दिया। अंग्रेजी शासन के कठोर दमन, गिरफ्तारियों, जेलों और असंख्य कठिनाइयों के बावजूद स्वतंत्रता सेनानियों ने अद्वितीय साहस, अटूट संकल्प और राष्ट्र के प्रति असीम समर्पण का परिचय दिया। स्वतंत्रता सेनानियों के निस्वार्थ त्याग और बलिदान ने राष्ट्रीय आंदोलन को मजबूत किया और अंतत 1947 में भारत की स्वतंत्रता का मार्ग प्रशस्त किया।

सभापति ने कहा कि 'भारत छोड़ो आंदोलन' की वर्षगांठ केवल इतिहास को याद करने का अवसर नहीं है, बल्कि उन महान स्वतंत्रता सेनानियों के आदर्शों को आत्मसात करने का भी समय है, जिन्होंने मातृभूमि की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया।

उन्होंने कहा कि देशभक्ति, राष्ट्रीय एकता, त्याग और राष्ट्रसेवा के उनके आदर्श आज भी एक सशक्त, समृद्ध और समावेशी भारत के निर्माण के लिए प्रेरणा देते हैं। सदन के सभी सदस्य स्वतंत्रता संग्राम के शहीदों और 'भारत छोड़ो आंदोलन' में भाग लेने वाले सभी वीरों को श्रद्धांजलि देने में उनके साथ शामिल हुए।

इसके बाद सभापति समेत सभी सदस्यों से अपने स्थान पर खड़े होकर स्वतंत्रता संग्राम के अमर बलिदानियों की स्मृति में कुछ समय के लिए मौन रखा। शुक्रवार को राज्यसभा में सदन की कार्यवाही शुरू होते ही सभापति ने भारत छोड़ो आंदोलन की 84वीं वर्षगांठ का उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि इस ऐतिहासिक अवसर पर भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लेने वाले सभी स्वतंत्रता सेनानियों और देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीरों को श्रद्धांजलि अर्पित करना हम सबका कर्तव्य है। स्वतंत्रता सेनानियों के देशप्रेम, एकता, त्याग और राष्ट्रसेवा के आदर्श मजबूत, समृद्ध और समावेशी भारत के निर्माण के लिए प्रेरणा देते हैं।

Source: IANS

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