सिमुलेशन प्रैक्टिस करते नजर आए जेरेमी हैनसेन, जानें एस्ट्रोनॉट्स के लिए क्यों जरूरी है ये

नई दिल्ली, 16 मई । एस्ट्रोनॉट्स की जिंदगी इतनी आसान भी नहीं होती। स्पेस के लिए उड़ान भरने से पहले उन्हें कई अभ्यास करने पड़ते हैं। ऐसे ही एक अभ्यास का नाम है सिमुलेशन प्रैक्टिस। कनेडियन स्पेस एजेंसी (सीएसए) ने सोशल मीडिया पर एस्ट्रोनॉट जेरेमी हैनसेन का एक नया वीडियो पोस्ट किया, जिसमें हैनसेन ह्यूस्टन वापस लौटकर सिमुलेटेड की प्रैक्टिस करते नजर आ रहे हैं।

अपने ऑफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट पर जेरेमी हैनसेन का एक नया वीडियो पोस्ट किया है। इसमें हैनसेन ह्यूस्टन वापस लौटकर सिमुलेटेड अभ्यास करते नजर आ रहे हैं। यह अभ्यास भविष्य के आर्टेमिस मिशनों में चंद्रमा की सतह पर होने वाले स्पेसवॉक को और बेहतर बनाने के लिए किए जा रहे हैं।

सीएसए ने वीडियो के साथ लिखा, “कुछ लोगों को आराम नहीं मिलता!” आर्टेमिस II मिशन से पृथ्वी पर लौटने के बाद भी जेरेमी हैनसेन लगातार तैयारी में जुटे हुए हैं। इस सिमुलेटेड अभ्यास का मुख्य उद्देश्य यह समझना है कि चंद्रमा पर उतरते ही अंतरिक्ष यात्री सूट पहनकर कैसे प्रभावी ढंग से काम कर सकें।

अब सवाल है कि सिमुलेटेड अभ्यास क्या है और क्यों किया जाता है? सिमुलेटेड अभ्यास यानी नकली या अनुकरण आधारित प्रशिक्षण। इसमें अंतरिक्ष यात्रियों को वास्तविक मिशन जैसा माहौल बनाकर ट्रेनिंग दी जाती है। इसमें स्पेससूट पहनकर शारीरिक गतिविधियां, उपकरणों का उपयोग और विभिन्न चुनौतियों का सामना करना शामिल होता है।

यह तरीका इसलिए अपनाया जा रहा है क्योंकि आर्टेमिस II का क्रू अभी पूरी तरह अपनी शारीरिक क्षमता में वापस नहीं आ पाया है। चंद्रमा पर उतरने के तुरंत बाद काम शुरू करने की स्थिति को ध्यान में रखकर ये अभ्यास किए जा रहे हैं। इससे पता चलता है कि वास्तविक मिशन में क्या चुनौतियां आ सकती हैं और उन्हें कैसे बेहतर तरीके से हैंडल किया जा सकता है।

स्पेसवॉक में मॉडलिंग और सिमुलेशन बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये अंतरिक्ष यान और पूरे मिशन के प्रदर्शन का गहराई से विश्लेषण, मूल्यांकन और परीक्षण करने में मदद करते हैं। इससे मुश्किल भरे मिशनों को असल में शुरू करने से पहले उनकी सुरक्षा, दक्षता और सफलता सुनिश्चित की जा सकती है।

स्पेस एजेंसिज के पास इस क्षेत्र में उन्नत सुविधाएं हैं। यहां मिशन सिमुलेशन, वर्चुअल रियलिटी ट्रेनिंग, थर्मल विश्लेषण, पावर सिस्टम टेस्टिंग, इलेक्ट्रोमैग्नेटिक विश्लेषण, सॉफ्टवेयर इंटीग्रेशन और हार्डवेयर-इन-द-लूप टेस्टिंग जैसी कई आधुनिक क्षमताएं उपलब्ध हैं, जिसमें असली अंतरिक्ष यात्री सिमुलेटेड माहौल में काम करते हैं।

Source: IANS

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