माना पटेल: 8 साल की उम्र में शुरू की तैराकी, इंजरी से राह हुई मुश्किल, फिर ओलंपिक में क्वालीफाई कर रचा इतिहास

नई दिल्ली, 17 मार्च। एक बड़ी पुरानी कहावत है, "पूत के पांव पालने में ही दिख जाते हैं।" यह लाइनें भारत की तैराक माना पटेल पर पूरी तरह से फिट बैठती हैं। माना का तैराकी से दूर-दूर तक वास्ता नहीं था। 8 साल की उम्र में माना की मां ने उनको तैराकी में सिर्फ इसलिए उतारा ताकि उनकी भूख खुल जाए और वह अच्छे से खाना शुरू कर दें। मां का वह फैसला माना की जिंदगी का सबसे अहम फैसला साबित हुआ।  

माना पटेल का जन्म 18 मार्च 2000 को अहमदाबाद के गुजरात में हुआ। महज 8 साल की उम्र में स्विमिंग पूल में उतरते ही माना इस तरह से तैराकी करने लगीं, जैसे वह इस खेल से काफी लंबे समय से जुड़ी हुई हैं। माना धीरे-धीरे इस खेल में रम गईं और उन्होंने क्लब स्तर पर कई बड़ी उपलब्धियों को अपने नाम करना शुरू कर दिया। माना बेहद कम समय में तैराकी में लड़कों को भी पीछे छोड़ने लगीं। महज 13 साल की उम्र में माना ने जूनियर नेशनल स्तर का रिकॉर्ड तोड़ा। इसके बाद दक्षिण एशियाई खेलों में भी उन्होंने 2 स्वर्ण समेत कुल 6 पदक अपने नाम किए। साल 2018 में सीनियर नेशनल चैंपियनशिप में माना ने 3 स्वर्ण पदक जीते। वहीं, 2019 में उन्होंने एशियाई चैंपियनशिप में एक स्वर्ण, 4 रजत और 1 कांस्य पदक जीता।

साल 2017 में माना पटेल का कंधा बुरी तरह से चोटिल हो गया और वह इस साल किसी भी प्रतियोगिता में हिस्सा नहीं ले सकीं। भारतीय तैराक ने अपना पूरा ध्यान रिहैब पर लगाया। हालांकि, इस मुश्किल समय में माना का छह किलो वजन भी कम हो गया। माना को एक समय पर ऐसा भी लगा कि उन्हें शायद तैराकी छोड़ देनी चाहिए। हालांकि, माना हालातों से हारने वाली खिलाड़ी नहीं थीं और इसके बाद उन्होंने जोरदार वापसी की। माना का बैकस्ट्रोक स्पर्धाओं में कोई जवाब नहीं है। साल 2020 में माना ने टोक्यो ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करते हुए इतिहास रच दिया। माना यह उपलब्धि हासिल करने वाली पहली भारतीय महिला तैराक बनीं। माना ने लाख मुश्किलों के बावजूद हार नहीं मानी और अपने बुंलद हौसलों के दम पर कामयाबी हासिल की।

माना पटेल की सफलता के पीछे उनकी कड़ी मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास का बड़ा योगदान रहा। उन्होंने यह साबित किया है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत सच्ची हो, तो किसी भी बाधा को पार किया जा सकता है। आज वह न केवल एक सफल खिलाड़ी हैं, बल्कि देश के युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बन चुकी हैं। भविष्य में माना पटेल से और भी बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद की जा रही है। भारतीय खेल जगत को उनसे आने वाली अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदकों की उम्मीद है। उनकी यात्रा यह दर्शाती है कि समर्पण और दृढ़ निश्चय से किसी भी सपने को साकार किया जा सकता है।

Source: IANS

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