एशियन गेम्स: लॉकडाउन में पिता का बिजनेस हुआ ठप्प, बेचनी पड़ी जमीन;

कोल्हापुर, 20 सितंबर । सोनम मस्कर ने रविवार को एशियन गेम्स 2026 में महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफ टीम स्पर्धा में देश के लिए सिल्वर मेडल जीता। परिवार बेटी की इस उपलब्धि से बेहद खुश है। सोनम ने पिता का बिजनेस ठप्प होने के बाद आर्थिक मुश्किलों के बीच कड़ी मेहनत करते हुए खुद को तपाया है।

भारतीय टीम ने इस स्पर्धा में शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 1898.0 अंक हासिल किए और रजत पदक अपने नाम किया। इस टीम में सोनम मस्कर ने 634.1 अंकों के साथ शानदार प्रदर्शन किया और क्वालिफिकेशन राउंड में तीसरा स्थान हासिल किया। उनके साथ एलावेनिल वलारिवन ने 633.5 अंक हासिल करते हुए सातवां स्थान प्राप्त किया, जबकि विदर्सा कोचालुमकाल विनोद ने 630.4 अंक हासिल कर

सोनम की इस सफलता के पीछे उनके परिवार का बेहद संघर्षपूर्ण और भावुक सफर छिपा है।

मस्कर परिवार कई वर्षों पहले व्यवसाय के सिलसिले में मुंबई में जाकर बस गया था। बच्चों की पढ़ाई भी अच्छी तरह चल रही थी, लेकिन अचानक कोरोना महामारी का संकट आया और पढ़ाई अधूरी छोड़कर परिवार को कोल्हापुर स्थित अपने गांव लौटना पड़ा। गांव लौटने के बाद परिवार के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया। आजीविका के लिए इस्तेमाल होने वाला एक टैंकर बेचना पड़ा। इसके बाद अगले दो-तीन वर्षों में मुश्किलें और बढ़ गईं। परिवार को एक और टैंकर बेचना पड़ा।

बच्चों की पढ़ाई और सोनम के शूटिंग के महंगे उपकरणों में किसी तरह की कमी न आए, इसके लिए परिवार ने घर की साढ़े 10 गुंठे जमीन और गडहिंग्लज स्थित दुकान तक बेच दिया। माता-पिता ने वर्षों तक भारी आर्थिक परेशानियां झेलीं, लेकिन उन्होंने अपने बच्चों के सपनों पर कभी आंच नहीं आने दी।

पिता उत्तम मस्कर ने 'आईएएनएस' को बताया, "बेटी ने 11वीं क्लास में राइफल शूटिंग को चुना। इस खेल में बहुत खर्चा था, लेकिन उन्होंने अपनी मां से बात की। शुरुआती दो महीनों में ही उन्होंने स्टेट लेवल की प्रतिस्पर्धा में हिस्सा लिया, जिसके बाद उन्हें इस खेल में काफी रुचि जागी। मैंने साफतौर पर कह दिया था कि 12वीं क्लास की परीक्षा के बाद ही इस खेल को जारी रखा जा सकता है। लॉकडाउन के समय मेरा बिजनेस ठप्प हो गया, जिसके बाद हमें गांव में आना पड़ा। लॉकडाउन के बाद कोल्हापुर की 'वेद एकेडमी' में राधिका मैडम और रोहित सर के मार्गदर्शन में उसका बेस मजबूत हुआ, जिसके बाद उनका एनसीओई में चयन हुआ और अब वह दिल्ली में है।"

मां सुमन ने बताया, "बेटी की उपलब्धि पर बहुत गर्व महसूस हो रहा है। वह परिवार से दूर रहती हैं, जिसकी वजह से कभी-कभी भावुक हो जाती है, लेकिन देश के लिए यह सब करना पड़ता है। प्रैक्टिस के दौरान वह 5-6 घंटे खड़ी रहती है और भारी-भरकम की राइफल व भारी ड्रेस के साथ कड़ी मेहनत करती है; स्कोर अच्छा न होने पर वह शाम को वापस प्रैक्टिस के लिए जाती है।"

बहन मानसी ने सोनम की उपलब्धि पर खुश जताते हुए कहा, "हमें उनकी इस उपलब्धि पर गर्व है। जितना उन्होंने संघर्ष और हार्ड वर्क किया है, उस हिसाब से एशियन गेम्स में सिल्वर मेडल जीतना एक सराहनीय है। भारी-भरकम किलो की राइफल उठाने के कारण उन्हें कभी-कभी कंधे में दर्द होता है, लेकिन उनकी मेहनत को देखकर पूरा विश्वास है कि वह ओलंपिक में भी देश के लिए गोल्ड मेडल जीतेंगी।"

भाई ने बताया, "सामान्य भाई-बहनों की तरह मजाक-मस्ती होती है, लेकिन बिजी शेड्यूल के कारण दिन में केवल 5-10 मिनट ही बात हो पाती है। बातचीत में हमेशा ओलंपिक में देश के लिए गोल्ड मेडल लाने के लक्ष्य पर ही चर्चा होती है।"

पिता के त्याग और पूरे परिवार की मेहनत को ध्यान में रखते हुए सोनम ने मैदान पर अपने निशाने को सटीक साधा और भारत को पहला पदक दिलाया। इस ऐतिहासिक सफलता के बाद सोनम ने अपना अगला लक्ष्य भी साफ कर दिया है। उन्होंने कहा, "2028 के ओलंपिक खेलों में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतना ही मेरा मुख्य लक्ष्य है और इसके लिए मैं अभी से कड़ी मेहनत और तैयारी कर रही हूं।" सोनम की इस कामयाबी ने न सिर्फ उनके परिवार के संघर्ष को सार्थक किया है, बल्कि कोल्हापुर और महाराष्ट्र के लिए भी यह गर्व का क्षण बन गया है।

आरएसजी/डीएससी

Source: IANS

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