केंद्र सरकार ने विदेश सचिव विक्रम मिस्री का बढ़ाया कार्यकाल, अगले आदेश तक पद पर बने रहेंगे

नई दिल्ली, 1 जुलाई । विदेश सचिव विक्रम मिस्री का कार्यकाल तय समय से एक साल आगे बढ़ा दिया गया है। यह जानकारी बुधवार को दी गई।

कैबिनेट की नियुक्ति समिति (एसीसी) ने 1989 बैच के भारतीय विदेश सेवा (आईएफएस) अधिकारी विक्रम मिस्री के कार्यकाल को एक साल के लिए बढ़ाने की मंजूरी दे दी है। उनका मौजूदा कार्यकाल 14 जुलाई 2026 को खत्म होना था, लेकिन अब वह अगले आदेश तक इस पद पर बने रहेंगे।

मिनिस्ट्री ऑफ पर्सनल, पब्लिक ग्रीवांसेज एंड पेंशन्स के तहत डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल एंड ट्रेनिंग (डीओपीटी) की ओर से जारी यह ऑर्डर फंडामेंटल रूल 56(डी) के प्रोविजन्स को लागू करता है।

विक्रम मिस्री एक अनुभवी राजनयिक हैं और उन्होंने भारत के लिए कई महत्वपूर्ण द्विपक्षीय और अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारियां संभाली हैं। साल 2024 में विदेश सचिव बनने के बाद से वह भारत की विदेश नीति को दिशा देने वाली प्रमुख भूमिका में रहे हैं।

उनका कार्यकाल ऐसे समय में रहा है, जब दुनिया में कई बड़े बदलाव हो रहे हैं, जैसे पश्चिम एशिया और यूक्रेन में तनाव, इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की बदलती स्थिति, ग्लोबल साउथ में भारत की बढ़ती भूमिका और चीन, पाकिस्तान व बांग्लादेश जैसे पड़ोसी देशों के साथ अहम मुद्दे।

सूत्रों के अनुसार, यह कार्यकाल बढ़ाने का फैसला सरकार के मिस्री के नेतृत्व पर भरोसे और भारत की विदेश नीति में निरंतरता बनाए रखने की जरूरत को देखते हुए लिया गया है।

मिस्री ने पाकिस्तान, यूरोप और अमेरिका में भी काम किया है। वह म्यांमार और चीन में भारत के राजदूत भी रह चुके हैं। उन्होंने अमेरिका, क्वाड देशों और यूरोपीय देशों के साथ भारत के रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई है।

संकट के समय में भी उनकी भूमिका को काफी अहम माना गया है, जैसे संघर्ष वाले इलाकों से भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकालना और रक्षा और तकनीक के क्षेत्र में महत्वपूर्ण सहयोग बढ़ाना।

यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब भारत कई बड़े कूटनीतिक कार्यक्रमों की तैयारी कर रहा है, जिसमें ब्रिक्स की मौजूदा अध्यक्षता से जुड़े कार्यक्रम, जी20 से जुड़े संभावित कदम और कई महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठकें शामिल हैं।

यह पहली बार नहीं है, जब मौजूदा सरकार के दौरान किसी वरिष्ठ अधिकारी का कार्यकाल बढ़ाया गया है। महत्वपूर्ण पदों पर अक्सर ऐसे अनुभवी अधिकारियों को बनाए रखने की कोशिश की गई है, जिनके पास लंबे समय का अनुभव और संस्थागत समझ हो।

Source: IANS

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